छत्तीसगढ़ के ‘फेफड़े’ को खनन से बचाने 300 किमी पैदल चल रहे हैं 350 ग्रामीण

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टीआरपी डेस्क। जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए छत्तीसगढ़ के आदिवासियों ने कमर कस ली है। सीमित संसाधन होने के बावजूद खदान प्रभावित आदिवासी 3 अक्टूबर से 300 किलोमीटर तक की पैदल यात्रा के लिए 350 लोग निकले हैं। से सभी आदिवासी कोरबा और सरगुजा जिले के आस-पास गांव के हैं। जो लगातार पिछले 9 दिनों से अपनी धरती को बचाने अपने घरों से पैदल निकले हैं।

बता दें कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में दस्तावेज के मुताबिक अडानी कंपनी को एमडीओ के तहत कोयला खनन को मिली है। आदिवासी सरकार के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। हसदेव अरण्य क्षेत्र जो सरगुजा, कोरबा, बिलासपुर आदि जिलों में फैला हुआ है और इसमें करीब 1,70,000 हेक्टेयर में जंगल है और इसमें 23 कोयला खदान प्रस्तावित है।

ग्रामीण हसदेव अरण्य क्षेत्र में चल रही और प्रस्तावित कोयला खनन परियोजनाओं के विरोध में उनका कहना है कि राज्य के “फेफड़े” वन पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा है। यह क्षेत्र जैव विविधता में समृद्ध है और हसदेव और मांड नदियों के लिए जलग्रहण क्षेत्र है, जो राज्य के उत्तरी और मध्य मैदानी इलाकों की सिंचाई करते हैं।

दो जिलों के प्रदर्शनकारियों के एक संयुक्त मंच हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के अनुसार, उनके विरोध के बावजूद, क्षेत्र में छह कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए हैं, जिनमें से दो खनन के लिए चालू हो गए हैं। परसा पूर्व और केटे बसन (पीईकेबी) ब्लॉक , और चोटिया- I और -II ब्लॉक।

एक अन्य ब्लॉक – परसा – को वन और पर्यावरण मंजूरी मिल गई है, यहां तक ​​​​कि ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ग्राम सभा की सहमति के बिना शुरू हुई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तीन अन्य ब्लॉकों में ग्राम सभाओं की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण शुरू हो गया है: केटे एक्सटेंशन, मदनपुर साउथ और गिधमुडी पटुरिया।

लोगों का कहना है कि परसा कोल ब्लॉक की वन स्वीकृति ग्रामसभा का फर्जी प्रस्ताव बनाकर हासिल की गई। शासन-प्रशासन सबको पता है कि उसके बावजूद न ही तो आजतक फर्जी प्रस्ताव को निरस्त किया गया, न ही दोषियों पर कार्रवाई की गई। हमारी मांग है कि इस प्रकार के फर्जी सहमति को निरस्त किया जाए।   

ग्रामीणों की मांग

  •  हसदेव अरण्य क्षेत्र की समस्त कोयला खनन परियोजना निरस्त किया जाए।
  • बिना ग्राम सभा सहमती के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल बोरिंग एक्ट 1957 के तहत किए गए सभी भूमि अधिग्रहण को तत्काल निरस्त किया जाएl
  • पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी कानून से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के पूर्व ग्राम सभा से अनिवार्य सहमती के प्रावधान को लागू किया जाए। 
  • परसा कोल ब्लाक के लिए फर्जी प्रस्ताव बनाकर हासिल की गई वन स्वीकृति को तत्काल निरस्त कराएं ग्राम सभा का फर्जी प्रस्ताव बनाने वाले अधिकारी और कंपनी पर एफआईआर दर्ज की जाए।
  • घाटबर्रा के निरस्त सामुदायिक वन अधिकार को बहाल करते हुए सभी गांव में सामुदायिक वन संसाधन और व्यक्तिगत वन अधिकारों को मान्यता दो l
  • पेसा कानून 1996 का पालन किया जाए

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