नरेगा सॉफ्टवेयर जल्द होगा दुरूस्त, मजदूरी भुगतान में आ रही ट्रान्जेक्शन रिजेक्शन्स की समस्या होगी दूर

टीआरपी डेस्क। मजदूरी भुगतान में आ रही ट्रान्जेक्शन रिजेक्शन की आ रही समस्या जल्द दूर होगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव के निर्देश पर राज्य मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) कार्यालय ने समस्या को दूर करने सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मनरेगा आयुक्त ने श्रमिकों को बैंक से जारी पास-बुक में अंकित नाम व खाता क्रमांक के आधार पर नरेगा सॉफ्टवेयर (नरेगा-सॉफ्ट) में दर्ज श्रमिकों के नाम व खाता क्रमांक को दुरूस्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत प्रोग्रामरों व सहायक प्रोग्रामरों के जरिए त्रुटियों को समय-सीमा में ठीक करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ट्रान्जेक्शन रिजेक्शन जैसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। उल्लेखनीय है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने 28 जून को मनरेगा कार्यों की समीक्षा के दौरान मजदूरी भुगतान में तेजी लाने इस समस्या के जल्द निराकरण के निर्देश दिए थे।

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जिला पंचायतों के सीईओ को जारी परिपत्र में कहा गया है कि मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी भुगतान निर्धारित समय-सीमा में किया जाना है, किंतु श्रमिकों के खातों में विभिन्न प्रकार की समस्याओं के कारण मजदूरी भुगतान के ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हो रहे हैं। इससे श्रमिकों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाता है। ट्रांजेक्शन रिजेक्ट होने के प्रमुख कारणों में “अमान्य खाता प्रकार, ऐसा कोई खाता नहीं, खाता बंद या स्थानांतरित, निष्क्रिय आधार, केवाईसी अपडेट नहीं, खाता मौजूद नहीं है, आधार को खाते से नहीं जोड़ा गया, बैंकों के मर्ज होने की स्थिति में अमान्य बैंक पहचानकर्ता, आई.एफ.एस. कोड का गलत होना एवं दावारहित खाता” हैं।

इन समस्याओं को निराकृत करने के लिए समस्यावार की जाने वाली कार्यवाही संबंधी मार्गदर्शिका सभी जिलों को परिपत्र के साथ भेजी गई है। मनरेगा आयुक्त ने सभी जिलों को भेजी गई मार्गदर्शी-सूची अनुसार आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई तत्काल करने को कहा है। उन्होंने मार्गदर्शी-सूची में उल्लेखित समस्याओं के अतिरिक्त कोई अन्य समस्या आने या किसी समस्या का समाधान नहीं हो पाने पर ऐसे मामलों की जानकारी सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ राज्य कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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