सुप्रीम कोर्ट

टीआरपी डेस्क। दिवाली से पहले पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन अब इस फैसले को नामंज़ूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस प्रतिबंध को हटाया जाए।

सात लाख परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि पटाखा उद्योग से लगभग सात लाख परिवारों का घर चलता है। अगर पश्चिम बंगाल में पटाखों की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है, तो विक्रेताओं और निर्माताओं को अपूरणीय क्षति होगी, जिससे पटाखा उद्योग पूरी तरह से बंद हो सकता है और लाखों लोगों पर आर्थिक संकट आ जाएगा।

किन त्योहारों पर लगा पटाखों पर बैन?

पश्चिम बंगाल में कलकत्ता हाईकोर्ट ने जिन त्योहारों के लिए बैन लगाया गया है, उनमें काली पूजा, दिवाली, छठ पूजा और क्रिसमस हैं। इससे पहले, पश्चिम बंगाल सरकार ने दिवाली पर दो घंटे (8-10), छठ पूजा पर 6-8, नए साल के मौके पर 35 मिनट पटाखों को फोड़ने की अनुमति दी थी। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन मौकों पर पटाखों के इस्तेमाल और सेल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया।

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