बालको ने मरघट को भी पाट दिया है बिजली कारखाने की राख से, नाराज लोगों ने किया चक्का जाम तो प्रबंधन हुआ नतमस्तक
बालको ने मरघट को भी पाट दिया है बिजली कारखाने की राख से, नाराज लोगों ने किया चक्का जाम तो प्रबंधन हुआ नतमस्तक

कोरबा। बिजली कारखानों से होने वाले प्रदूषण की त्रासदी झेल रहे कोरबा शहर के लोग इन दिनों बालको के बिजली कारखाने से निकलने वाली राख से काफी परेशान हैं। बालको प्रबंधन पर आरोप है कि वह अपने कारखाने की राख कहीं भी फेंक रहा है। आलम यह है कि बालको की खड़िया बस्ती के मरघट को भी राख से पाट दिया गया है। इस मुद्दे पर बालको के आम लोगों ने जनप्रतिनिधियों के साथ चक्का जाम कर दिया, इसके बाद बैठक हुई और प्रबंधन आंदोलनकारियों की सारी मांगें पूरी करने को तैयार हो गया।

निजीकरण के बाद से बढ़ी परेशानियां

एल्युमिनियम बनाने वाले बालको संयंत्र का जब से निजीकरण हुआ है तब से यहां के लोगो की परेशानियां काफी बढ़ गईं हैं। पहले बालको के रेडमड पॉण्ड से एसिड का रिसाव यहां के नाले में होता था, अब यहां के बिजली कारखाने से कोयले की राख को निकाल कर यत्र-तत्र फेंका जा रहा है। बालको ने यह काम किसी ठेका कंपनी को दे रखा है, इस कंपनी ने बालको ही नहीं बल्कि शहरी इलाके की बस्तियों को भी नहीं छोड़ा। पूर्व में अनेक शिकायतों के बावजूद बालको की शह पर ठेका कंपनी कही भी राख फेंक रही है और इससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

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सड़क पर किया धरना-प्रदर्शन

काफी समय से परेशान आम लोगों से जब नहीं रहा गया तब इन लोगों ने बालको के मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। इसमें आम लोगों के अलावा भाजपा पार्षद हितानन्द अग्रवाल, अजय गोंड़, जोगेश लांबा सहित अनेक भाजपा नेता, कार्यकर्त्ता और अन्य दलों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। काफी देर तक यहां सड़क जाम रही और लोगों को रुट बदल कर जाना पड़ा।

प्रशासन की मौजूदगी में हुई वार्ता

काफी शोर-शराबे के बाद यहां पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारी पहुंचे और आंदोलनकारियों ने इन्हें 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा, जिस पर मौके पर ही चर्चा हुई। इस दौरान बालको की ओर से एक्सटर्नल अफेयर्स के अधिकारी अनिल मिश्रा और प्रशासन की तरफ से तहसीलदार सुरेश साहू तथा पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे। भाजपा नेता जोगेश लाम्बा और पार्षद हितानन्द अग्रवाल ने बताया कि बालको के बिजली कारखाने से निकलने वाली राख को कहीं भी फेंक दिया जा रहा है। बालको ने आश्वस्त किया है कि वह यत्र-तत्र फेंकी गई राख को उठवा लेगा। इसके अलावा रिस्दी मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लगाने और सड़क को दुरुस्त करने की मांग को भी बालको ने जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया है। यह सारी कार्रवाई लिखित में हुई है।

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बालको के अधिकारियों को ले जाना चाहती थी मरघट तक

चक्का जाम में शामिल खड़िया प्रजाति की पांचोबाई नामक महिला से जब मिडिया कर्मियों ने बात की तब उसने बताया कि वह बालको के अधिकारियों से सवाल करना चाहती थी और उन्हें खड़िया समाज के लिए बने मरघट तक ले जाकर पैदल चलवाना चाहती थी, ताकि उन्हें भी हो रही परेशानी का पता चल सके। महिला ने बताया कि उनके मरघट को बालको वालो ने राख से पाट दिया है। उसकी मांग थी कि मरघट को दोबारा पुराने स्वरुप में लाया जाये।

गड्ढों को भरने की आड़ में चल रहा है खेल

कोरबा जिले में अनेक निजी और सरकारी बिजली कारखाने हैं, जहां कोयले से निकलने वाली राख एक समस्या बन गई है। इस बला को टालने के लिए कारखाना संचालक शहर और आसपास के इलाकों में लो-लाइंग एरिया याने गड्ढेनुमा स्थानों की खोज करके उसे राख से पाटने की अनुमति प्रशासन से ले लेते हैं। इसके बाद इलाके के लोगों की परेशानी शुरू हो जाती है। राख की ट्रांसपोर्टिंग करने वाले इलाके में कहीं भी राख फेंक कर चले जाते हैं। बाद में आप शिकायत करते रहें, कोई भी सुनने वाला भी नहीं रहता।

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ऐसा ही कुछ बालको प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है। बालको में खड़िया आदिवासियों की एक बस्ती के लिए मरघट है और इस मरघट को भी प्रबंधन ने राख से पाट दिया है। इसके अलावा यहां की सड़कों पर भी धूल की जगह राख उड़ती रहती है। काफी समय बाद जब लोगों का गुस्सा फूट पड़ा तब सबने मिलकर चक्का जाम कर दिया। इन्हे इलाके के पार्षदों और राजनैतिक दलों का भी समर्थन मिला। आखिरकार प्रशासन ने इनकी सुनी मगर यह आंदोलन तब सार्थक होगा जब बालको प्रबंधन अपनी हरकतों से बाज आते हुए लोगों को राख की समस्या से निजात दिलाएगा।

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