प्रदेश के 3 नगर पंचायतों से आदिवासी बाहुल्य गांवों को किया गया पृथक
प्रदेश के 3 नगर पंचायतों से आदिवासी बाहुल्य गांवों को किया गया पृथक

रायपुर। बस्तर संभाग के अनेक ग्राम पंचायतो को नगर पंचायत में तब्दील किये जाने का विरोध अब रंग लाने लगा है। इस संबंध में राज्यपाल अनुसुइया उइके की पहल का परिणाम यह निकला कि राज्य सरकार ने 3 नगर पंचायतों से आदिवासी बाहुल्य गांवों को विधिवत ढंग से पृथक करते हुए इसकी अधिसूचना प्रकाशित कर दी है।

ग्रामीणों की यह थी मांग

दरअसल छत्तीसगढ़ में अनेक ऐसे आदिवासी बाहुल्य जिले हैं जो पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं और विधि का पालन किये बिना इन जिलों में अनेक ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया। पिछले कुछ सालों से इसका विरोध शुरू हो गया है और इस मुद्दे को लेकर इलाके के आदिवासी जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों ने राजयपाल को अनेकों बार ज्ञापन देकर अनुरोध किया था कि पांचवी अनुसूची के क्षेत्र के तहत् आने वाली ग्राम पंचायतें जो पूर्व में नगर पंचायत में शामिल कर ली गई थी, उन्हें पुनः ग्राम पंचायत बनाया जाए। क्योंकि नगर पंचायत में शामिल होने के कारण उन गांवों में आरक्षण में परिवर्तन, ग्रामीण क्षेत्रों को मिलने वाली राशि एवं अन्य लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस पर राज्यपाल सुश्री उइके ने विचार करते हुए वनवासियों के अधिकार के लिए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव को समय-समय पर पत्र लिखकर निर्देश दिए थे, जिस पर पहल की शुरुआत हो गई है।

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इन नगर पंचायतों का किया गया विघटन

राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार नगर पंचायत डौण्डी (जिला-बालोद) की सीमा में सम्मिलित ग्राम पंचायत/ग्राम उकारी को पृथक किया गया है। इसी प्रकार नगर पंचायत चिखलाकसा (जिला-बालोद) की सीमा से ग्राम पंचायत/ग्राम कारूटोला, झरनदल्ली (भोयरटोला), कुंजामटोला को पृथक किया गया है।

जिला-दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा की नगर पालिका परिषद् बड़े बचेली की सीमा से महात्मा गांधी वार्ड से बड़ेपारा, शहीद वीर नारायण वार्ड से पांडूपारा, लाल बहादुर शास्त्री वार्ड से तामोपारा, सुभाष चंद्र वार्ड से चालकी पारा, मांझीपारा, कोवा पारा, पटेल पारा, पुजारी पारा, महरा पारा, काया पारा, कुम्हार पारा को पृथक किया गया है।

अभी और भी हैं कतार में

बता दें कि राजभवन सचिवालय से पूर्व में नगर पंचायत प्रेमनगर, बस्तर एवं नरहरपुर नगर पंचायत को पुनः ग्राम पंचायत बनाने के संबंध में पत्र भेजा गया था, जिस पर शासन स्तर पर कार्यवाही लंबित है। राज्यपाल द्वारा शेष नगर पंचायतों के ग्राम पंचायतों में विघटन के किये पुनः स्मरण पत्र लिखा गया है।

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योजनाओं का लाभ नहीं

राज्यपाल को नगर पंचायत चिखलाकसा और नगर पंचायत डौण्डी से हाल ही में पृथक किए गए ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधिमण्डल ने अवगत कराया कि उनकी पंचायतों को विकास हेतु शासन द्वारा आबंटित राशि और मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। इस संबंध में भी राजभवन सचिवालय से राज्य शासन को पूर्व की तरह उक्त ग्राम पंचायतों के विकास हेतु आबंटित राशि और सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र भेजा गया है।

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