TRP DESK : एपेक्स और सियान टावर साल 2012 में 13 मंजिला तक बन चुके थे, लेकिन जब यह मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका था। तब बिल्डर ने अपनी सूझ-बुझ दिखाते हुए इसे महज डेढ़ साल में ही 19 मंजिला तक निर्माण करवा डाला। पर बिल्डर्स की चलाकी यहां भी काम ना आई। साल 2014 में हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद काम बंद हो गया। इसे किसी तरह का नुकसान ना हो इसके लिए इसकी ऊंचाई बढ़ा दी गई। लेकिन नागरिकों और पर्यावरण की सुरक्षा को मदे नजर रखते हुए हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।

दलीलों को समझा और टावरों को ध्वस्त करने का फैसला

एमराल्ड कोर्ट परियोजना के लिए सुपरटेक को 13.5 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। साल 2009 मने ही परियोजना का 90 फीसदी यानी करीब 12 एकड़ हिस्से का कार्य पूरा कर लिया गया था। फ्लैट के खरीदार जा शिफ्ट होने लगे तो 10 फीसदी हिस्से को ग्रीन जोन दिखाया गया। 2011 आते-आते दो नए टावरों के बनने की खबरें आने लगीं। कोर्ट ने आरडब्ल्यूए की इन दलीलों को समझा और टावरों को ध्वस्त करने का फैसला बरकरार रखा।

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कब क्या हुआ

प्राधिकरण ने साल 2004 में सेक्टर-93ए स्थित ग्रुप हाउसिंग के लिए प्लॉट नंबर-4 सुपरटेक को आवंटित किया। साल 2006 में प्राधिकरण ने बिल्डिंग प्लान में संशोधन करते हुए दो मंजिल अतिरिक्त बनाने की अनुमति दी। इसके बाद 2009 में फिर से परियोजना में बदलाव करते हुए 15 की जगह 17 टावर बनाने का नक्शा पास कर हुआ। इसके बाद मार्च 2012 में प्राधिकरण ने टावर नंबर 16 और 17 के लिए एफएआर और बढ़ा दिया। इससे दोनों टॉवर को 40 मंजिल तक करने की मंजूरी मिली। अप्रैल 2014 में हाईकोर्ट ने ट्विन टावरों को अवैध करार देते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए। जिसके बाद 31 अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन टावरों को ध्वस्त करने के हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रख अंतिम फैसला सुनाया।

आखिर क्यों गिराया जा रहा है सुपरटेक ट्विन टॉवर

दरअसल इन दोनों टावरों का निर्माण गैर क़ानूनी तरीके से शर्तो के अधीन किया गया था। इसके 40 मंजिला टावरों का निर्माण 2009 में हुआ। सुपरटेक के दोनों टावरों में 950 से ज्यादा फ्लैट्स बनाए जाने थे। आरोप लगाते हुए कई खरीदार 2012 इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए थे। इसमें 633 लोगों ने फ्लैट बुक करा रखें थे। जिसमें से 248 रिफंड ले चुके हैं। 133 दूसरे प्रोजेक्ट्स में शिफ्ट हो गए, लेकिन 252 ने अब भी निवेश कर रखा है। 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्विन टावर को अवैध घोषित कर उसे गिराने का आदेश दे दिया था। पर उस वक्त हाईकोट सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।