विधायक भीमा मांडवी हत्याकांड की न्यायिक जांच 4 साल बाद भी अधूरी, फिर 2 महीने का समय बढ़ाया
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विशेष संवादाता, रायपुर
भाजपा विधायक भीमा मंडावी की हत्या मामले की न्यायिक जांच 4 साल में भी पूरी नहीं हो पाई है। सरकार ने एक बार फिर न्यायिक जांच आयोग का कार्यकाल दो महीनों के लिए बढ़ा दिया है। न्यायमूर्ति सतीश के. अग्निहोत्री आयोग को 7 नवम्बर 2022 तक जांच पूरी करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने का फैसला किया था।


8 मई 2019 को सरकार ने सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति सतीश के. अग्निहोत्री की अध्यक्षता वाला एकल न्यायिक जांच आयोग गठित कर दिया। तबसे मामले की जांच मुकाम तक नहीं पहुंची है। दंतेवाड़ा विधायक पर नक्सलियों ने 9 अप्रैल 2019 को श्यामागिरी गांव के पास हमला किया था। आईईडी धमाके से मंडावी का बुलेटप्रुफ वाहन उड़ा दिया गया था। बाद में घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में विधायक भीमा मंडावी, उनका ड्राइवर और तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए। इस हत्याकांड के दो दिन बाद यानी 11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिये मतदान होना था। शुरुआती जांच में सामने आया कि पुलिस ने विधायक को बार-बार उस रास्ते से ना जाने को कहा था। पुलिस अधिकारियाें का कहना था, उस रास्ते को सुरक्षित नहीं किया जा सका था, ऐसे में विधायक का वहां से गुजरना खतरनाक हो सकता था। हाल ही में नवा रायपुर में एनआईए की नई बिल्डिंग के उद्घाटन मौके पर सीएम बघेल ने झीरम और भीमा मांडवी हत्याकांड की जांच पूरी करने की बात कही थी।

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