Salaam Venky Movie Review: हिंदी सिनेमा में गंभीर बीमारियों पर कई फिल्म बन चुकी हैं, जिससे हमे अच्छी सिख भी मिलती है और सकारात्मकता जगाने की कोशिश भी करती हैं। इनमें ‘गजनी’, ‘आनंद’, ‘हिचकी’, ‘पीकू’, ‘तारे जमीन पर’ और ‘माय नेम इज खान’ जैसी फिल्में शामिल है। अब इस लिस्ट में फिल्म ‘सलाम वेंकी’ का नाम भी जुड़ गया है। यह फिल्म 9 दिसंबर यानी की आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। रेवती का इस फिल्म से बतौर डायरेक्टर डेब्यू है।

रेवती साउथ सिनेमा और बॉलीवुड का जाना- माना नाम है। वहीं काजोल इस फिल्म से लगभग 16 साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं हैं। इससे पहले वे 2006 में रिलीज हुई फिल्म ‘फना’ में आमिर खान के साथ नजर आईं थी। मजेदार बात ये है कि इस फिल्म में आमिर भी नजर आएंगे। दरअसल फिल्म में उनका कैमियो है। फिल्म में कजोल और विशाल जेठवा मुख्य किरदार में हैं, इनके साथ राहुल बोस, राजीव खंडेलवाल, अहाना कुमरा और प्रकाश राज जैसे कलाकार भी अहम किरदारों में हैं।

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मूवी रिव्यु

एक्टिंग

मां के किरदार में काजोल ने कमाल का काम किया है। कैसे एक मां अपने ही बेटे के लिए मौत की मांग करती है, इस किरदार के जरिए काजोल ने बखूबी दिखाया है। काजोल को हमने चुलबुले किरदार में ज्यादा देखा है लेकिन यहां एक अलग अंदाज में दिखती हैं और वो आपका दिल जीत लेती हैं. वेंकी के किरदार में विशाल जेठवा की एक्टिंग जबरदस्त है वो अपने अंदाज से आपको खूब रुलाते हैं और हंसाते भी हैं। बिस्तर पर लेटे-लेटे जब वो फिल्मी डायलॉग बोलते हैं तो कमाल लगते हैं। इस फिल्म की जान विशाल ही हैं। राजीव खंडेलवाल डॉक्टर के किरदार में हैं और जमे हैं। अहाना कुमरा जर्नलिस्ट बनी हैं और वो भी काफी इम्प्रेंस करती हैं। वकील के किरदार में राहुल बोस का काम भी अच्छा है। प्रकाश राज ने भी जज के किरदार में अच्छा काम किया है।

डायरेक्शन

फिल्म को रेवती ने डायरेक्ट किया है और उनका डायरेक्शन कमाल का है। इमोशन्स को रेवती ने जिस तरह से पिरोया है उससे वो आपको इमोशनल करने में पूरी तरह से कामयाब रही हैं। फिल्म का म्यूजिक काफी अच्छा है और कहानी की पेस को बड़े अच्छे तरीके से आगे बढ़ाता है। मिथुन ने म्यूजिक डिपार्टमेंट में कमाल का काम किया है।

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कहानी

फिल्म एक बीमार बेटे की कहानी पर आधारित है, जो मौत से जंग लड़ रहा होता है और इस जंग में उसकी मां यानी काजोल हर कदम पर उसका साथ देती है। इस फिल्म में मां और बेटे के बीच इमोशन्स और जज्बातों को बहुत ही अच्छे तरीके से दिखाया गया है, जिसे देखकर आप भी भावुक हो जाएंगे। वैंकी को डीएमडी ( Duchenne Muscular Dystrophy ) नामक एक बीमारी होती है जिसमें इंसान की मौत 16 से 17 साल की उम्र में ही हो जाती है, लेकिन वैंकी अपनी इच्छाशक्ति के दम पर 24 साल तक जिंदा रह पाता है।
कहानी में 2005 के समय का बैकड्रॉप दिखाया गया है जिसमें एक मां अपने बेटे की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए कई पड़ावों से गुजरती है। दरअसल वैंकी यह चाहता है कि उसकी मृत्यु के बाद उसके बॉडी आर्गेन जरुरत मंद व्यक्तियों को डोनेट कर दिए जाए लेकिन हमारे देश का कानून इसमें आ जाता है। क्या वैंकी की मां उसकी अंतिम इच्छा पूरी कर पाएगी और उसकी मां के किन – किन मुश्किलों से गुजरना पड़ता है , यह जानने के लिए आपको सिनेमाघरों में जाना होगा।

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