नई दिल्ली । बेमौसम बारिश की वजह से गेहूं, चना, सरसों के साथ मौसमी सब्जियां महंगी हो सकती है। अगर उत्पादन कम हुआ तो इसका सीधा असर दामों पर पड़ेगा। इस बात को लेकर सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। अगर खाद्य चीजों के दाम बढ़े तो इसका असर आम आदमी की जेब पर तो पड़ेगा, साथी रिटेल महंगाई में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार खाद्य और कृषि मंत्रालय दोनों इस काम पर लग गए हैं कि बेमौसमी बारिश से किस-किस फसल को कितना नुकसान हो सकता है, पहले इसका ब्यौरा इकट्ठा कर लिया जाए। फिर इस बारे में उपायों पर विचार किया जाएगा। सरकार को ज्यादा चिंता गेहूं और चने की है। गेहूं के दाम पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने हाल ही में 30 लाख टन गेहूं को खुले बाजार में बेचा, तब जाकर गेहूं के दाम में स्थिरता आई है। साथ ही आटा भी थोड़ा सस्ता हुआ है। अगर फिर गेहूं के दाम बढ़े तो आटे की कीमत बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर आम आदमी की थाली पर पड़ेगा।

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एक व‎रिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अभी इस मामले में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। सरकार की पूरी कोशिश होगी कि खाद्य चीजों के दामों में बढ़ोतरी न हो। बेमौसमी से जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कैसे की जाए, इस बारे में जल्द फैसला लिया जाएगा। वैसा सरकार का अनुमान है कि फसल वर्ष 2022-23 जुलाई-जून में गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 11.22 करोड़ टन रह सकता है। किसानों का कहना है कि बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल गिर गई है। गेहूं में अभी दाना कच्चा है, वह काला पड़ जाएगा। गिरे रहने से फसल की उत्पादन क्षमता कम हो जाएगी और भूसा भी खराब हो जाएगा।

पानी भरा रहने से गेहूं गल भी सकता है। खेत की जमीन गीली होने से पौधा हवा में गिर गया। उसके दाने झड़ गए। इससे भी काफी नुकसान हुआ है। किसानों ने कहा कि सब्जियों पर इस बारिश का प्रतिकूल असर पड़ता दिख रहा है। खेत में पानी के कारण या ज्यादा वक्त गीला रहने के कारण खीरा, ककड़ी, तोरी, लौकी आदि सब्जी के खराब होने का खतरा है।   

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