रायपुर। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के सहयोग से हसदेव अरण्य क्षेत्र के कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के 17 गांव की ग्रामसभाओं ने वनाधिकार मान्यता कानून 2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त कर लिया है। लेमरू हाथी रिजर्व के रूप में अधिसूचित होने के बाद जिला स्तरीय समिति ने सभी दावों को स्वीकृत कर सामुदायिक वन संसाधन के अधिकारों को मान्यता प्रदान की है।

कोल ब्लॉक के चलते नहीं मिल रही थी मान्यता

दरअसल हसदेव अरण्य क्षेत्र में कई कोल ब्लॉक प्रस्तावित थे। यही वजह है कि यहां के जंगल में लेमरू हाथी रिजर्व का प्रस्ताव आधार में लटका दिया गया था, साथ ही सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के तहत किये जा रहे दावों को भी दरकिनार कर दिया गया था। बता दें कि इस इलाके में पतुरिया, गिदमुड़ी, मदनपुर साउथ सहित 9 कोल ब्लॉक प्रस्तावित थे।

करना पड़ा लंबा संघर्ष

हसदेव अरण्य क्षेत्र के इलाके में आने वाले गांवों के निवासियों द्वारा यहां कोयला खदान खोले जाने का जमकर विरोध किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर कई संगठनों ने भी इन ग्रामीणों का साथ दिया और इनकी मांग का समर्थन किया। इस बीच ग्रामीणों ने वन अधिकार के तहत यहां के जंगलों का वन अधिकार कानून के तहत सामुदायिक अधिकार मांगा गया, चूंकि यहां कई कोयला खदानें प्रस्तावित थीं, इसलिए इन्हे मान्यता नहीं दी गई।

See also  लखनऊ अब सिर्फ मुस्कुराएगा ही नहीं दहाड़ेगा भी, रक्षामंत्री ने किया ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट व DRDO लैब का शिलान्यास, जाने क्या है खास

इसका विरोध करते हुए वर्ष 2021 में हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति की राजधानी तक पदयात्रा निकली गई। इसी दरम्यान राज्य सरकार ने हसदेव का 1995 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व के रूप में घोषित किया, जिससे इस क्षेत्र में प्रस्तावित सभी कोल ब्लॉक की स्वीकृति की प्रक्रिया रोकते हुए आवंटन निरस्त किए गए थे।

ग्रामीणों ने जताई ख़ुशी

हसदेव अरण्य बचाओ समिति के संयोजक उमेश्वर सिंह आर्मो सहित सभी पंचायतों के सरपंचों ने एक बैठक आयोजित कर इस उपलब्धि को संघर्ष की एक महत्वपूर्ण जीत बताते हुए हसदेव अरण्य के समृद्ध जंगलों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया ।

‘रोकी जाये जंगल की कटाई’

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक सदस्य आलोक शुक्ला ने कहा कि यह एक सुखद अवसर है, कि जिस जंगल में खनन परियोजना प्रस्तावित थी, अब ग्रामसभा उस जंगल का संरक्षण और प्रबंधन करेगी।

गौरतलब है कि वनाधिकार मान्यता कानून आदिवासियों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को खत्म करने के लिए बनाया गया था। इस कानून का जितना प्रभावी क्रियान्वयन होगा आदिवासी और अन्य वन पर निर्भर समुदाय के साथ उतना ही न्याय होगा। उन्होंने कहा कि हसदेव के सरगुजा क्षेत्र में वनाधिकार मान्यता कानून का उल्लंघन करके खनन के लिए जंगल की कटाई के कार्यों को रोका जाना चाहिए।

See also  26 मई को एटक यूनियन एसईसीएल के सभी खदानों पर मनाएगा काला दिवस

राज्य सरकार ने जारी किया है बजट

बता दें कि छत्तीसगढ़ में पिछले 5 वर्षो में 4 हजार से ज्यादा गांव में सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार मान्य किए गए हैं। वर्तमान में राज्य सरकार के द्वारा उन सभी गांव में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति (सीएफएमसी) का गांव स्तर पर गठन कर जंगल की सुरक्षा एवं प्रबंधन हेतु विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए है।

सामुदायिक वन संसाधन प्राप्त गांव की ग्रामसभा अपने वन संसाधनों की प्रबंधन योजना तैयार कर जंगल वन विभाग के सहयोग से जंगल का संरक्षण, प्रबंधन और पुनरूत्पादन का कार्य करेंगे। इस हेतु राज्य सरकार ने प्रत्येक CFMC के लिए बजट भी जारी किया है।

इस मौके पर मदनपुर सरपंच देवसाय मरपच्ची, उपसरपंच राजू सिंह मरपच्ची, धजाक सरपंच धनसाय मंझवार, खिरटी सरपंच जयसिंह बिंझवार,मोरगा उपसरपंच सुनील कुमार अग्रवाल, गिद्धमुड़ी वनाधिकार अध्यक्ष एवं अन्य गांव के मुखिया साथी भी उपस्थित रहे।