नेशनल डेस्क। आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत लेकर आ सकता है। वित्त मंत्रालय ने इस बार खपत बढ़ाने और देश की आर्थिक गति को तेज करने के लिए टैक्स में कटौती के कई सुझावों पर विचार किया है। इसके साथ ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कल्याणकारी योजनाओं और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देकर खपत को बढ़ावा देने का प्रयास भी किया जाएगा। इस बार का बजट विकसित राष्ट्र के विजन पर केंद्रित होगा।

मध्यम वर्ग को टैक्स राहत का इशारा

विशेषज्ञों ने कहा कि खपत बढ़ाने के लिए मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ कम करना सरकार की प्राथमिकता होगी। इससे लोगों के पास बचत का दायरा बढ़ेगा। बचत बढ़ने पर लोग अपनी जरूरतों पर ज्यादा खर्च कर पाएंगे। बचत की स्थिति में संपत्ति, ऑटोमोबाइल से लेकर अन्य क्षेत्रों में पैसा खर्च करने की दर बढ़ेगी। संकेत हैं कि सरकार 10-12 लाख की सालाना आय वाले लोगों के लिए टैक्स स्लैब में बदलाव कर सकती है।

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सूत्र बताते हैं कि वित्त मंत्रालय से इस बात की संकेत मिले हैं कि सरकार न्यू टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाएगी। 10-12 लाख की सालाना आय वाली श्रेणी में आने वाले नौकरी पेशा व अन्य लोगों पर कर का बोझ कम किया जाएगा। हालांकि बीते दिनों उद्योग जगत ने 20 लाख तक की सालाना आय वर्ग में आने वाले लोगों को आयकर छूट सीमा में अतिरिक्त लाभ दिए जाने का सुझाव दिया था लेकिन सरकार चाहती है कि न्यू टैक्स रिजीम में स्लैब परिवर्तित करके 10 से 12 लाख सालाना की श्रेणी में आने वाले लोगों को लाभ दिया जाए। उधर, संगठनों के प्रतिनिधियों ने अलग-अलग तरह के मांगों को अपने सुझावों के साथ उठाया है।

आप भी दे सकते हैं बजट को लेकर अपने सुझाव

आम बजट को लेकर केंद्र सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म mygov.in पर 10 जनवरी से आप भी अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके पीछे सरकार का मकसद है कि लोगों के अच्छे रचनात्मक सुझावों को बजट में शामिल किया जाए।

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अन्य मुख्य मांगे एवं सुझाव

सरकार से 80सी के तहत कटौती सीमा बढ़ाने की भी मांग की जा रही है, जिसे सरकार ने बीते करीब 10 वर्षों से नहीं बढ़ाया है। हालांकि इसकी संभावना कम है क्योंकि सरकार न्यू टैक्स रिजीम को प्रोत्साहन देना चाहती है।

श्रमिक संगठनों ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत मिलने वाली पेंशन को पांच गुना तक बढ़ाने और आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग को उठाया है। ईपीएफओ से जुड़ी पेंशन को बढ़ाने के मांग लंबे समय से की जा रही है।

-मानक कटौती सीमा को 75 हजार रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख किए जाने की मांग है। हालांकि जानकार कहते हैं कि सरकार इस बार इसे 75 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये तक कर सकती है।