टीआरपी डेस्क। भारत में तुर्किए के खिलाफ जनविरोध लगातार तेज होता जा रहा है। पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई कर उसका समर्थन करने वाले तुर्किए को अब व्यापार और पर्यटन दोनों ही मोर्चों पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पहले सेब का बहिष्कार हुआ, फिर पर्यटन उद्योग ने मुंह मोड़ा, और अब उदयपुर के मार्बल व्यापारियों ने तुर्किए से आयात पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है।

उदयपुर का बड़ा कदम: तुर्किए से मार्बल खरीद पर रोक

मार्बल उद्योग के लिए मशहूर उदयपुर ने तुर्किए के खिलाफ बड़ा फैसला लिया है। उदयपुर मार्बल प्रोसेसर्स कमेटी के अध्यक्ष कपिल सुराणा ने बताया कि समिति के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से तुर्किए से मार्बल आयात बंद करने का निर्णय लिया है।

अगर पूरे देश की मार्बल इंडस्ट्री तुर्किए से व्यापार बंद कर दे, तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि भारत की जनता सरकार के साथ खड़ी है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत को भी मजबूती देगा। गौरतलब है कि भारत में आयातित मार्बल का करीब 70% हिस्सा तुर्किए से आता है।

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पुणे से शुरू हुआ सेब का बहिष्कार

पहलगाम आतंकी हमले और भारत द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जब तुर्किए ने पाकिस्तान का खुला समर्थन किया, तो देशभर में विरोध की लहर फैल गई। इसी कड़ी में पुणे के व्यापारियों ने तुर्किए से सेब आयात न करने का निर्णय लिया।
भारत हर साल तुर्किए से 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये के सेब आयात करता रहा है। इस बहिष्कार के बाद अब ये सेब बाजारों से लगभग गायब हो चुके हैं और दूसरे देशों से आयात किया जा रहा है।

पर्यटन पर भी पड़ा असर: तुर्किए और अजरबैजान के खिलाफ मोर्चा

तुर्किए और उसके सहयोगी अजरबैजान को भी भारतीय पर्यटकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ईंजॉयमॉय ट्रिप और काक्स एंड किंग्स जैसी नामी ट्रैवल कंपनियों ने इन देशों के टूर पैकेज निलंबित कर दिए हैं। बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटकों ने इन गंतव्यों की यात्रा रद्द कर दी है।

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पहले मालदीव, अब तुर्किए: बदले रुख का असर साफ

कुछ महीने पहले मालदीव को भी भारत विरोधी बयानबाज़ी के चलते भारतीयों के गुस्से का सामना करना पड़ा था। इसके जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप की खूबसूरत तस्वीरें साझा कर देशवासियों से घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील की थी। इसका असर ये हुआ कि बड़ी संख्या में पर्यटकों ने मालदीव की जगह लक्षद्वीप को प्राथमिकता दी, जिससे मालदीव को भारी आर्थिक झटका लगा।