जगदलपुर। मैं देख नहीं सकती, पर जब नल से पानी गिरने की आवाज सुनती हूं तो मन को बहुत सुकून मिलता है… यह शब्द हैं कदेर गांव की नेत्रहीन कोसी बाई के, जिनके घर पहली बार नल से पानी पहुंचा है। उनके पति मुरा राम नुरूटी, जो एक पैर से दिव्यांग हैं, कहते हैं- मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारे घर में भी नल लगेगा और साफ पानी मिलेगा। ये सपना साकार किया है क्रेडा विभाग ने, विष्णु देव साय सरकार के कार्यकाल में।

जिला मुख्यालय नारायणपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित कदेर गांव अब विकास की नई पहचान बन रहा है। यहां के हर घर में अब नल से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत क्रेडा विभाग द्वारा लगाए गए सोलर ड्यूल पंप सिस्टम ने इस बदलाव की नींव रखी है।

कोसी बाई और मुरा राम की कहानी बनी मिसाल


कदेर गांव के इस दिव्यांग दंपती की कहानी ना सिर्फ भावुक कर देती है, बल्कि यह बताती है कि योजनाएं जब जमीनी स्तर पर सही तरीके से क्रियान्वित होती हैं, तो लोगों की जिंदगी सच में बदल जाती है। पहले मुरा राम को रोज़ कांवड़ में झरिया से पानी लाना पड़ता था, जो उनके लिए बेहद कष्टदायक था। लेकिन अब नल से लगातार मिल रहा पानी उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं।

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बस्तर के विकास में अहम भूमिका निभा रहा क्रेडा


क्रेडा विभाग ने बस्तर अंचल के दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न केवल सौर ऊर्जा के जरिए उजाला फैलाया है, बल्कि पेयजल की समस्या से जूझ रहे गांवों को राहत भी दी है। विभाग के मुताबिक अब तक बस्तर संभाग में कुल 10,206 सोलर ड्यूल पंप लगाए जा चुके हैं।

‘इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, सेवा और विश्वास है प्राथमिकता’: सीईओ राणा


क्रेडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश सिंह राणा ने बताया कि, “हम सिर्फ संयंत्र लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसके सतत संचालन और रखरखाव के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना नहीं, बल्कि सेवा की निरंतरता और जनविश्वास की स्थापना है।”

तीन सोलर पानी टंकियां बनीं गांव की रीढ़


जल जीवन मिशन के तहत कदेर गांव में तीन सोलर आधारित पानी टंकियों का निर्माण कर गांव के प्रत्येक घर तक पाइपलाइन बिछाई गई है। इसका लाभ न केवल कोसी बाई और मुरा राम को मिला है, बल्कि पूरे गांव को शुद्ध पेयजल की समस्या से निजात मिल गई है।

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