टीआरपी डेस्क। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में ‘ज़ीरो टॉलरेंस ऑन क्राइम’ की नीति को एक बार फिर अनुकरणीय रूप में देखा गया। लखनऊ में राज्य सरकार के मंत्री और पूर्व IPS अधिकारी असीम अरुण ने अपने ही निजी सचिव जय किशन सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। सचिव पर समाज कल्याण विभाग की महिला कर्मचारी से अश्लीलता करने का आरोप लगा है।

मंत्री ने खुद बुलाई पुलिस

घटना तब हुई जब पीड़िता महिला कर्मचारी, मंत्री असीम अरुण से मिलने उनके कार्यालय पहुंची और फूट-फूटकर रोते हुए अपना दर्द बयां किया। उसने आरोप लगाया कि सचिव जय किशन सिंह लगातार अभद्र टिप्पणियां और अश्लील हरकतें कर रहा था। मामला सुनते ही मंत्री ने बिना किसी देरी के सचिव को तलब किया और सामने ही पूछताछ की। जब सचिव बहाने बनाने लगा, तो असीम अरुण ने खुद पुलिस को कॉल कर मौके पर बुलाया।

See also  Family Suicide : 4 बच्चियों के साथ पिता ने यमुना में लगाई छलांग! 2 शव मिले, 3 की तलाश जारी, देखें वीडियो…

मंत्री की मौजूदगी में दर्ज हुई FIR

गोमती नगर थाना प्रभारी बृजेंद्र चंद्र त्रिपाठी अपनी टीम के साथ कार्यालय पहुंचे। पीड़िता की तहरीर मंत्री की उपस्थिति में ली गई, जिसके आधार पर सचिव जय किशन सिंह को गिरफ्तार कर थाने ले जाया गया। पुलिस ने संबंधित IPC की धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है। आरोपी को शीघ्र कोर्ट में पेश किया जाएगा।

कौन है आरोपी जय किशन सिंह ?

जय किशन सिंह समाज कल्याण विभाग में समीक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। वह मूल रूप से प्रयागराज के बमरौली क्षेत्र के रहने वाले हैं और वर्तमान में लखनऊ के चिनहट स्थित विक्रांत खंड में अपने परिवार के साथ रहते हैं। बताया जा रहा है कि सचिव का व्यवहार पहले भी संदिग्ध रहा है, लेकिन यह पहला मौका है जब किसी महिला कर्मचारी ने खुलकर शिकायत दर्ज कराई है।

मंत्री असीम अरुण की कार्यशैली की सराहना

पूर्व IPS अधिकारी रहे असीम अरुण ने राजनीति में आने से पहले भी प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई के लिए पहचान बनाई थी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित किया कि वह अब मंत्री पद पर रहते हुए भी ‘न्याय पहले’ की नीति पर अमल कर रहे हैं।

See also  Viral Video: कांकेर में हाईवे के पास दिखा तेंदुओं का जोड़ा, नंदनमारा गांव में दहशत, देखिए VIDEO 

सोशल मीडिया पर हो रही सराहना

असीम अरुण की इस निडर और निष्पक्ष कार्रवाई की सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना हो रही है। आम जन से लेकर अफसरशाही तक, मंत्री के इस कदम को एक नई राजनीतिक परंपरा की शुरुआत बता रहे हैं, जहां कानून सबके लिए समान है, चाहे वह कोई मंत्री का सचिव ही क्यों न हो।