टीआरपी डेस्क। Rishi Panchami 2025 : सनातन धर्म में देवी देवताओं के अलावा ऋषि मुनि, साधु संतों का पूजन करने को भी महत्व दिया गया है। ऋषियों को पूजने की ऐसी ही परंपरा भाद्रपद माह में गणेश पूजन के अगले दिन पंचमी तिथि पर निभाई जाती है। यह परंपरा ऋषि पंचमी के नाम से प्रसिद्ध है। सनातन धर्म के प्रसिद्ध सप्त ऋषियों में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस वर्ष 20025 में 28 अगस्त को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी। ऋषि पंचमी का पूजन करने से अंजाने में हुए पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महिलाओं से यदि मासिक धर्म के दौरान धर्म का पालन करने से भूलचूक हो जाए तो उस पाप से मुक्ति मिलती है। इस दिन गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। जो लोग गंगा स्नान के लिए नहीं जा सकते, वे घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

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पूजन का शुभ मुहूर्त
पंचमी तिथि 27 अगस्त को दोपहर 3.44 बजे से प्रारंभ होकर 28 अगस्त को शाम 5.56 मिनट तक है। चूंकि उदयातिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए 28 अगस्त को सूर्योदय के दौरान पड़ने वाली पंचमी तिथि पर ऋषि पंचमी का पूजन करना श्रेष्ठ है।

ऐसे करें पूजा

  • ऋषि पंचमी के दिन सुबह स्नान करके पूजा घर को साफ करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
    -इसके बाद सप्तऋषियों की फोटो अथवा अपने गुरुदेव की फोटो स्थापित कर सप्त ऋषियों का स्मरण करें। कलश में गंगाजल भरें।
    -सप्तऋषियों को अर्ध्य दें और धूप-दीप दिखाएं। पूजा में फल, फूल, घी, पंचामृत अर्पित करें।
  • सप्तऋषियों के मंत्रों का जप करके गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।
  • बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद लें।