टीआरपी डेस्क। नेपाल में GEN-Z आंदोलन के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन ने मंगलवार को उग्र रूप ले लिया, जब राजधानी काठमांडू में संसद भवन और सिंह दरबार को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया। इससे पहले सोमवार को पुलिस के साथ झड़प में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद गुस्सा और भड़क उठा।

मंगलवार को भारी भीड़ ने संसद परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की और संसद को आग लगा दी। देखते ही देखते पूरा भवन धुएं और आग की लपटों में घिर गया। संसद की दीवारें काली पड़ चुकी हैं और अंदर रखा सारा सामान  कुर्सियां, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जलकर खाक हो गया। यह वही संसद भवन है जिसे 2019 में सिंह दरबार परिसर के भीतर करीब 5.8 बिलियन नेपाली रुपये की लागत से बनाया गया था।

भीड़ ने सिंह दरबार के साथ-साथ देश भर में सरकारी इमारतों और नेताओं के घरों पर भी हमले किए। कई बंगलों में आगजनी के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और बैरिकेड्स के बावजूद हिंसा नहीं थमी।

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सेना प्रमुख ने देर रात एक बयान जारी कर कहा कि कुछ असामाजिक तत्व मौजूदा संकट का फायदा उठाकर सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने लूट और आगजनी को “योजना के तहत किया गया हमला” बताया।

इस बीच, देश में बढ़ते दबाव के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसा थमी नहीं है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

संसद भवन जहां पहले लोकतंत्र का केंद्र था, अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। प्रतिनिधि सभा, राष्ट्रीय सभा, मीडिया गैलरी, संसदीय समितियों के कक्ष और प्रशासनिक दफ्तर अब राख में बदल चुके हैं। नेपाली सांस्कृतिक धरोहर और वास्तुकला का प्रतीक यह इमारत अब सिर्फ एक जली हुई संरचना रह गई है।

जनता का गुस्सा फिलहाल शांत होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और जब तक भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और बेरोजगारी पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, आंदोलन जारी रहेगा।

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