Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने शनिवार को चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग को साफ करना चाहिए कि यह पुनरीक्षण किस चुनाव के लिए किया जा रहा है विधानसभा, लोकसभा, नगरीय निकाय या पंचायत। बैज ने कहा कि चुनाव से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया की शुरुआत से पहले आयोग को सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श करना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

बैज ने मतदाता सूची को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि नाम जोड़ने और काटने की प्रक्रिया अक्सर विवादों में रही है। इस बार आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या धांधली की गुंजाइश न रहे।

भाजपा का पोस्टर, कांग्रेस पर तंज

इधर, छत्तीसगढ़ भाजपा ने सोशल मीडिया पर एक कार्टून पोस्टर जारी किया। इसमें सचिन पायलट को भूपेश बघेल और दीपक बैज पर नाराजगी जताते हुए दिखाया गया है। पोस्टर में लिखा है छत्तीसगढ़ कांग्रेस में मची रार और कांग्रेस की रैली में रुपए बांटने के बाद भी नहीं जुट रही भीड़।

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इस पर पलटवार करते हुए दीपक बैज ने कहा कि भाजपा चाहे तो कांग्रेस की सभाओं में आकर वीडियोग्राफी कर सकती है। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, हम उन्हें बीच में सीट देंगे। वे खुद देख सकते हैं कि कितनी भीड़ जुट रही है।

ईडी और केंद्रीय एजेंसियों पर आरोप

बैज ने भाजपा और केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियां झूठे आरोपों के आधार पर कांग्रेस नेताओं को निशाना बना रही हैं। उनका कहना था कि विपक्ष को डराने के लिए कहानियां गढ़ी जा रही हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता इन हथकंडों से डरने वाले नहीं हैं।

कांग्रेस के कोषाध्यक्ष के लापता होने को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया, तो बैज ने व्यंग्यात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा, हमारा कार्यक्रम शानदार है। अगर कोषाध्यक्ष गायब है तो भाजपा जाकर ढूंढ ले। किरण देव और बाकी लोग मिलकर खोज लें।

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नक्सलियों की चिट्ठी पर प्रतिक्रिया

हाल ही में नक्सलियों द्वारा लिखी गई कथित चिट्ठी पर भी दीपक बैज ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस पर अभी सरकार ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। चिट्ठी कितनी सच है और कितनी अफवाह, यह सरकार को स्पष्ट करना होगा।

बैज ने राज्य सरकार की नक्सल नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नक्सल संगठन को कमजोर आंकना सरकार का ओवर कॉन्फिडेंस है। इसी लापरवाही के कारण हाल ही में एडिशनल एसपी शहीद हुए और एक अतिथि शिक्षक की भी जान गई। उन्होंने सरकार से अपील की कि सुरक्षा मामलों में ढिलाई और आत्मसंतुष्टि से बचा जाए।