टीआरपी। Tulsi vivah the wedding bells will ring again : चार महीने पूर्व हिंदू पंचांग के आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम कर रहे हैं। तबसे शुभ संस्कारों पर रोक लगी हुई है। जगत के संपूर्ण भार का संचालन भगवान भोलेनाथ कर रहे हैं। अब, चार महीने पश्चात कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि यानी देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने की परंपरा निभाई जाएगी। भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागकर पुनः सृष्टि संचालन का कार्यभार संभालेंगे। इस दिन भगवान विष्णु स्वरूपा शालिग्राम और लक्ष्मी स्वरूपा तुलसी का विवाह रचाने की परंपरा घर-घर में निभाई जाएगी। तुलसी विवाह के साथ ही पुनः विवाह के शुभ संस्कारों सहित अन्य संस्कार प्रारंभ हो जाएंगे।

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर प्रारंभ होगी। अगले दिन 2 नवंबर को सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी। 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर शाम 7 बजे से पूजा का शुभ मुहूर्त

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ध्रुव योग का संयोग

1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी पर शाम 7 बजे पूजा का शुभ मुहूर्त बन रहा है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र भी है, जो शाम 6.20 बजे तक रहेगा। साथ ही ध्रुव योग का संयोग भी है।

ऐसे करें तुलसी विवाह पूजन

  • पूजा से पहले घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • तुलसी पौधे के गमले की सफाई करके रंगरोगन करें।
  • तुलसी पौधे के समीप शालिग्राम की मूर्ति रखें।
  • तुलसी पौधे के चारों ओर गन्ना पेड से मंडप तैयार करें।
  • पूजन में मौसमी फल, मिठाई, और बेर-सिंघाड़े रखें।
  • दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी का पूजन करें।
  • घर पर ही विवाह की रस्म निभाकर मंत्रोच्चार करके विवाह संपन्न कराएं।
  • तुलसी के पौधे की परिक्रमा करें।