विजय बघेल,संतोष पांडेय,अरुण साव,विष्णु देव महेश गागड़ा व रामविचार के नाम पर चल रही चर्चा

रायपुर। विधानसभा चुनाव, निकाय व त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में लगातार हार के बाद प्रदेश भाजपा संगठन में बदलाव की चर्चा जोरों पर है। फिलहाल पार्टी हाईकमान में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को बदलने की तैयारी है। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश भाजपाध्यक्ष के लिए 6 नेताओं के नामों पर प्रमुखता से विचार विमर्श किया जा रहा है। इनमें विजय बघेल, संतोष पांडेय, अरुण साव, विष्णु देव साय, महेश गागड़ा व रामविचार नेताम का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश कार्यालय के लिए इमेज नतीजे

सत्ता में आने के बाद कांग्रेस जिस तेजी से प्रदेश में लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है और लगातार चुनाव जीत रही है, इससे भाजपा में खलबली मच गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व भी प्रदेश संगठन में तुरंत चीरफाड़ करने व संगठन में बदलाव की तैयारी कर चुके हैं। इसके मद्देनजर सबसे पहले प्रदेश भाजपाध्यक्ष को बदलने की तैयारी में है।

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सत्ता से बाहर होने के क़रीब डेढ़ साल में ही भाजपा आपसी अंतर्कलह से उबरने को तैयार नहीं है। आज से 15 साल पहले जो स्थिति कांग्रेस की लगभग वैसी ही स्थिति आज भाजपा के अंदर दिखाई देती है। पार्टी के अंदर नेताओं के बीच अंतर्कलह काफी बढ़ गई है। इस समय भाजपा में एकजुटता दिखाई नहीं देती है।

प्रदेश के बड़े नेताओं का पार्टी कार्यकर्ताओं में पकड़ ढीली होती जा रही है, इसका नतीजा हार के रूप में सामने आ रहा है। यही वजह है कि भाजपा अभी सत्तासीन कांग्रेस को किसी भी मुद्दे को लेकर ठीक से घेर नहीं पा रही है।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा को लोकसभा में मोदी के नाम जबरदस्त जीत मिली तो पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा, लेकिन निगम चुनाव में भाजपा धूल धूसरित हो गई। पंचायत चुनाव में कोई खास जीत हासिल नहीं हो पाई।

ऐसे माहौल में नए प्रदेशाध्यक्ष की तलाश चल रही है। नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश है और कई नाम उछल रहे हैं। इनमें कुर्मी साहू के रुप में पिछड़ा वर्ग, आदिवासी कार्ड या फिर जनरल सभी शामिल हैं, लेकिन जाति का कार्ड क्या असर करेगा या कोई ऐसा चेहरा जिसमें आक्रामकता हो, कार्यकर्ता को फिर से ऊर्जा भर देने का माद्दा हो वह असर करेगा।

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दरअसल प्रदेश भाजपाध्यक्ष का पद यहां कांटों का ताज है। विधानसभा चुनाव में अभी क़रीब साढ़े तीन बरस बाक़ी हैं और अभी कोई चुनाव सामने अब नहीं है। यानी इस अध्यक्षीय कार्यकाल के बाद अगला कार्यकाल आएगा तो चुनाव आएगा। बहरहाल पार्टी के अंदर जो नाम चर्चाओं में हैं उनमें विजय बघेल, संतोष पांडेय, अरुण साव, विष्णुदेव साय,महेश गागड़ा और रामविचार नेताम प्रमुखता से शामिल है। देखना यह है कि शीर्ष नेतृत्य किसे प्रदेश की कमान सौंपता है।

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