नारायणपुर। बस्तर के नारायणपुर जिले में पिछले दिनों आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को अब समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। इसी कड़ी में जिला प्रशासन द्वारा पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, केरलापाल, नारायणपुर के जरिए छत्तीसगढ़ आत्मसमर्पित नक्सलवादी/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति–2025 के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में आत्मसमर्पित नक्सलियों को कृषि आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम में कुल लगभग 200 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सलियों ने सहभागिता करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा कृषि आधारित आजीविका एवं स्वरोजगार से संबंधित जानकारी को गंभीरता से ग्रहण किया।

प्रशिक्षण के दौरान अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नशीने द्वारा खाद्य समूह एवं संतुलित आहार की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार में शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में शामिल होते हैं, जिससे व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है।

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डॉ. सविता आदित्य ने लाख की खेती की जानकारी दी गई तथा इसके उत्पादन, उपयोग एवं आय के स्रोतों पर प्रकाश डाला। डॉ. नवीन मरकाम ने बताया कि खेती में बीज का विशेष महत्व होता है। उन्होंने बीज की गुणवत्ता, बीज उत्पादन की प्रक्रिया तथा उत्तम बीज का चयन एवं अर्जन किस प्रकार किया जाए, इस विषय में विस्तृत जानकारी दी।

डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह ने उद्यानिकी के विषय में बताया जिसमें उन्होंने उद्यानिकी फसलों की देख रेख के बारे में बताया । डॉ. देवेंद्र कुर्रे द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों को कृषि आधारित उद्यम खोलने की जानकारी दी गई। उन्होंने कृषि से जुड़े छोटे-छोटे व्यवसाय, स्वरोजगार के अवसर एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता की संभावनाओं के बारे में बताया।

डॉ. विवेक विश्वकर्मा द्वारा पादप रोग विज्ञान विषय पर जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि पादप रोग विज्ञान फसलों में होने वाले रोगों के कारण, रोगजनकों एवं उनके प्रबंधन से संबंधित विषय है। साथ ही धान, रागी, सब्जियों एवं फलों में होने वाली प्रमुख बीमारियों की पहचान, उनके प्रबंधन तथा समेकित रोग प्रबंधन (IDM) के उपयोग से रोग नियंत्रण की जानकारी दी। वहीं राज सेंगर द्वारा मृदा विज्ञान विषय पर जानकारी देते हुए फसलों की उपज में मृदा के महत्व, छत्तीसगढ़ एवं बस्तर क्षेत्र की मिट्टी तथा मृदा के pH के बारे में विस्तार से बताया गया।

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