Raipur Municipal Corporation Warning Board Saddu Illegal Plotting.

टीआरपी।

राजधानी रायपुर के सड्डू (वार्ड क्रमांक 8) क्षेत्र में भू-माफियाओं द्वारा की जा रही अवैध प्लाटिंग को रोकने के लिए नगर पालिक निगम ने कड़ा रुख अपनाया है। निगम आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर जोन 9 की टीम ने अवैध प्लाटिंग वाले स्थलों पर बड़े चेतावनी बोर्ड स्थापित कर दिए हैं। इन बोर्डों के जरिए नागरिकों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई न गंवाएं।

अवैध प्लाटिंग वाले क्षेत्रों में न तो सड़कें होती हैं और न ही जल निकासी की व्यवस्था। सबसे बड़ी समस्या यह है कि ऐसी जमीनों पर निगम कभी ‘भवन निर्माण अनुज्ञा’ (Building Permission) नहीं देता। खरीदार अक्सर कम दाम के लालच में फंस जाते हैं और बाद में उन्हें मकान बनाने के लिए अनुमति नहीं मिलती और उनकी रजिस्ट्री भी संकट में पड़ जाती है।

“यहाँ प्लाट न खरीदें, नहीं मिलेगी भवन निर्माण अनुमति”

नगर निगम जोन 9 के कमिश्नर विवेकानंद दुबे के मार्गदर्शन में अधिकारियों ने सड्डू क्षेत्र का दौरा कर अवैध प्लाटिंग को चिह्नित किया। बोर्ड के माध्यम से अपील की गई है कि यह क्षेत्र अवैध प्लाटिंग का भाग है। यहाँ या इसके आसपास किसी भी प्रकार की प्लाट की खरीदी-बिक्री करना कानूनन गलत है।

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निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यहाँ निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि इसके बावजूद कोई यहाँ प्लाट की डीलिंग करता पाया जाता है, तो छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 की धारा 292 (ग) के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर तैनात रही निगम की टीम

बोर्ड लगाने की इस कार्यवाही के दौरान कार्यपालन अभियंता शरद ध्रुव, सहायक अभियंता सैयद जोहेब और उप अभियंता आशुतोष पाण्डेय उपस्थित थे। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को भी समझाइश दी कि वे बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) की अनुमति वाले विज्ञापनों से बचें।

  • प्रभावित क्षेत्र: वार्ड क्रमांक 8, सड्डू (जोन 9)।
  • दोषी धारा: छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 की धारा 292 (ग)
  • मुख्य निर्देश: अवैध प्लाटिंग क्षेत्र में भवन निर्माण अनुज्ञा की स्वीकृति नहीं मिलेगी।
  • अपील: प्लाट खरीदने से पहले निगम और टीएनसीपी के दस्तावेजों की जांच अवश्य करें।

नगर निगम अब शहर के अन्य आउटर क्षेत्रों जैसे अमलीडीह, विधानसभा रोड और डूंडा में भी इसी तरह के बोर्ड लगाने की योजना बना रहा है। साथ ही, अवैध प्लाटिंग करने वाले मूल भू-स्वामियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी भी तेज कर दी गई है।

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