टीआरपी डेस्क। सुबह सोकर उठते ही मोबाइल फोन की स्क्रीन को देखना आंखों की सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद से जागते ही तेज ब्लू लाइट के संपर्क में आने से आंखों की पुतलियों पर दबाव पड़ता है, जिससे भविष्य में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
सुबह उठते ही मोबाइल चलाने की आदत ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’ का प्रमुख कारण बन रही है, जिससे राज्य में आंखों से संबंधित मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है।
आंखों पर प्रभाव और सावधानियां
आंखें पूरी तरह खुली भी नहीं होतीं और हम नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया स्क्रॉल करने लगते हैं। सुबह के समय आंखें आराम की स्थिति में होती हैं, ऐसे में अचानक मोबाइल की तेज रोशनी उन्हें तनाव (Stress) देती है। इससे ड्राईनेस, जलन, सिरदर्द और आंखों की थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
अगर आप अपनी आई केयर को लेकर सजग हैं, तो ये 5 आदतें आज ही बदलें
- तुरंत स्क्रीन न देखें: जागने के कम से कम 20 मिनट बाद ही मोबाइल को हाथ लगाएं।
- ठंडे पानी का उपयोग: उठने के बाद ठंडे पानी से आंखें धोएं ताकि रात की ड्राईनेस खत्म हो।
- प्राकृतिक रोशनी: मोबाइल की जगह खिड़की से बाहर की नेचुरल लाइट देखें, यह मांसपेशियों को रिलैक्स करती है।
- 20-20-20 नियम: हर 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
- ब्लू लाइट फिल्टर: मोबाइल में नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर को हमेशा ऑन रखने की आदत डालें।



