टीआरपी। छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग ने राज्य की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक विरासत को संवर्धित करने के लिए वर्ष 2026-27 की छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को 5,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
यह योजना छत्तीसगढ़ के उन ग्रामीण और शहरी कलाकारों के लिए संजीवनी है जो पैसों की कमी के कारण अपनी कला को आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे। पंडवानी, करमा, सुआ और राउत नाचा जैसी पारंपरिक कलाओं को सीखने वाले युवाओं को अब सरकारी संरक्षण मिलेगा, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।
इन विधाओं में मिलेगा लाभ
सरकार ने इस छात्रवृत्ति के लिए व्यापक दायरे तय किए हैं। इसमें लोक एवं पारंपरिक जनजातीय कलाएं (गोंडी गायन, ददरिया, पंथी), शास्त्रीय संगीत (हिंदुस्तानी एवं कर्नाटक), शास्त्रीय नृत्य (कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी), रंगमंच और दृश्य कला (मूर्तिकला, पेंटिंग, फोटोग्राफी) शामिल हैं। इसके अलावा सुगम संगीत जैसे भजन, ग़ज़ल और कव्वाली के साधक भी इसके लिए पात्र होंगे।
आवेदन केवल पंजीकृत डाक के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। आवेदकों को अपने लिफाफे पर स्पष्ट रूप से “अर्थाभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों/छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना 2026-27” लिखना अनिवार्य होगा। चयन के बाद राशि सीधे DBT के माध्यम से बैंक खाते में भेजी जाएगी।
आयु सीमा: आवेदक की उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
आय सीमा: परिवार की वार्षिक आय 72,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
अनिवार्य शर्त: छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना और चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन जरूरी है।
अंतिम तिथि: आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 20 मार्च 2026 है।
इच्छुक कलाकार निर्धारित प्रारूप में अपने दस्तावेजों के साथ 20 मार्च तक आवेदन भेज सकते हैं। विभाग प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद योग्य कलाकारों की सूची जारी करेगा। विस्तृत जानकारी और आवेदन फॉर्म के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.cgculture.in पर लॉग इन किया जा सकता है।



