टीआरपी डेस्क। भारतीय शेयर बाजार के लिए आज यानी 23 मार्च 2026 का दिन अंधेरी सुबह लेकर आया है। वैश्विक बाजारों से मिले खराब संकेतों और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई अचानक तेजी ने घरेलू निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया है। बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में भारी बिकवाली देखी गई।

बाजार का ताजा हाल: सेंसेक्स-निफ्टी में कोहराम

BSE Sensex: सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 1,500 अंक (2%) से ज्यादा टूटकर 73,070 के स्तर पर आ गया। निफ्टी में भी 450 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,700 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास संघर्ष करता नजर आया।इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में मिनटों के भीतर करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई है।

गिरावट के 5 सबसे बड़े कारण


मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस क्रैश के पीछे ये प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं।

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क्रूड ऑयल में उबाल: मिडिल ईस्ट (खासकर ईरान-अमेरिका तनाव) के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें $114-$119 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

HDFC Bank में भारी बिकवाली: दिग्गज बैंक HDFC Bank के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण बैंक का शेयर 5% तक टूट गया, जिसने अकेले निफ्टी को नीचे खींचने में बड़ी भूमिका निभाई।

विदेशी निवेशकों (FIIs) का पलायन: मार्च महीने में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से ₹34,000 करोड़ से ज्यादा निकाल लिए हैं।

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 93.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे विदेशी निवेशकों में घबराहट है।

एशियाई बाजारों में गिरावट: जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी आज सुबह 2-3% की गिरावट के साथ खुले, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।

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इन शेयरों में मची सबसे ज्यादा भगदड़

BSE लार्जकैप के सभी 30 शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित स्टॉक्स की सूची इस प्रकार है।

शेयर का नामगिरावट (%)मुख्य कारण
Tata Steel4.00%वैश्विक मंदी की आहट और मांग में कमी
SBI3.00%बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली का दबाव
HDFC Bank5.10%चेयरमैन का इस्तीफा और गवर्नेंस मुद्दे
IndiGo2.50%एटीएफ (तेल) की कीमतों में बढ़ोतरी
Bajaj Finance2.67%लिक्विडिटी और ब्याज दरों का डर