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High Court grants major relief to women excluded from police recruitment

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार के तहत सीटों में आई बड़ी गिरावट को लेकर नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए स्कूल शिक्षा विभाग से ठोस जवाब मांगा है।

कोर्ट ने कहा कि जब मामला हजारों बच्चों के भविष्य से जुड़ा हो, तो सरकार को आधी-अधूरी जानकारी नहीं, बल्कि पूरी पारदर्शिता दिखानी होगी। याचिकाकर्ता भगवंत राव ने अपने वकील देवर्षि ठाकुर के जरिए कोर्ट में यह मामला उठाया। सुनवाई के दौरान चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया।

प्रदेश भर में 28 हजार सीटें हो गईं कम

बता दें कि साल 2021-22 में आरटीई के तहत 83,006 सीटें थीं, जो घटकर 2023-24 में करीब 55,266 रह गईं। यानी एक झटके में 28 हजार से ज्यादा सीटें कम हो गईं।

याचिकाकर्ता पक्ष ने इसे केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उनका कहना था कि इतने बड़े स्तर पर कमी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

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कोर्ट में यह भी सामने आया कि अलग-अलग समय पर सरकार ने जो आंकड़े दिए, उनमें मेल नहीं है। इस पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे विरोधाभास गंभीर चिंता का विषय हैं।

राज्य सरकार ने दलील दी कि आरटीई कानून 6 से 14 साल के बच्चों पर लागू होता है, इसलिए अब प्री-प्राइमरी (केजी) में एडमिशन नहीं दिए जा रहे हैं। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को पुराने रिकॉर्ड के आधार पर विरोधाभासी माना, क्योंकि पहले इस श्रेणी में एडमिशन दिए जाते रहे हैं।

सरकार की ओर से बताया गया कि आने वाले सत्र में केजी-2 से 35,335 बच्चे कक्षा एक में जाएंगे और 19,540 नई सीटों पर एडमिशन होंगे। कुल मिलाकर 54,875 बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला मिलेगा।

निजी स्कूलों की मान्यता पर सवाल

सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों की मान्यता और कामकाज पर भी गंभीर सवाल उठे। दुर्ग में कृष्णा पब्लिक स्कूल समूह के 4 स्कूलों के खिलाफ शिकायतें मिली। रायपुर में इसी समूह के 6 स्कूलों की जांच की गई, जिनमें 4 बिना मान्यता के संचालित पाए गए। ड्रीमलैंड स्कूल की मान्यता अब तक लंबित है। साथ ही नारायणा ई-टेक्नो स्कूल में गड़बड़ी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना किया गया। भिलाई के शंकर विद्यालय पर बिना उचित भवन के मान्यता देने का आरोप है।

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हाईकोर्ट ने कहा है कि अगली सुनवाई से पहले स्कूल शिक्षा विभाग को विस्तृत और स्पष्ट हलफनामा देना होगा।  अगली सुनवाई 8 अप्रैल को तय की गई है।