टीआरपी। राजधानी रायपुर की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की स्थिति को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को आप के कार्यकारी जिलाध्यक्ष सागर क्षीरसागर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने शहर के भीतर मालवाहक वाहनों की एंट्री पर लगाए गए प्रतिबंध को शिथिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे “राजनीतिक दबाव” का परिणाम बताया है।
रायपुर के एम जी रोड, राठौर चौक, फाफाडीह और गुढ़ियारी जैसे प्रमुख मार्ग शाम होते ही ‘चोक’ हो जाते हैं। एम्बुलेंस तक को रास्ता नहीं मिल पाता। कमिश्नर द्वारा फरवरी में लिया गया ‘नो एंट्री’ का फैसला जनता के लिए बड़ी राहत था, लेकिन इसका पालन रुकने से शहर फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आया है। यह मुद्दा सीधे तौर पर लाखों रायपुरवासियों की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़ा है।
“राजनीतिक दबाव में बदला फैसला”
आप नेता सागर क्षीरसागर ने कहा कि रायपुर के कई मार्गों का चौड़ीकरण हुआ और एक्सप्रेस-वे बने, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था जस की तस है। कमिश्नर ने 27 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी कर शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक छोटे मालवाहक वाहनों की ‘नो एंट्री’ लगाई थी, जिसे अब शिथिल कर दिया गया है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी और लोकसभा अध्यक्ष अज़ीम खान ने आरोप लगाया कि रावाभाटा में ट्रांसपोर्ट नगर बनने के बावजूद शहर के बीचों-बीच ट्रांसपोर्ट संचालित हो रहे हैं। राजनीतिक दबाव के कारण इन मालवाहकों को शहर से बाहर नहीं किया जा सका, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
मुख्य मांगें और प्रभावित मार्ग
प्रभावित मार्ग: एम जी रोड, राठौर चौक, अग्रसेन चौक, फाफाडीह, रेलवे स्टेशन मार्ग, गुढ़ियारी, रामनगर और मालवीय रोड।
मुख्य मांग: शाम 5 से रात 9 बजे तक मालवाहक वाहनों की ‘नो एंट्री’ को पुनः कड़ाई से लागू किया जाए।
आरोप: राजनीतिक रंग देने के कारण जनता की सुविधा की अनदेखी की जा रही है।
आश्वासन: कमिश्नर संजीव शुक्ला ने प्रतिनिधिमंडल को नियमों का कड़ाई से पालन कराने का भरोसा दिलाया है।
यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष इमरान खान ने चेतावनी दी है कि यदि ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन नहीं हुआ, तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी। अब देखना होगा कि कमिश्नर के आश्वासन के बाद क्या सड़कों पर फिर से पुलिस जवानों की तैनाती और चालानी कार्रवाई शुरू होती है या ट्रांसपोर्टर्स का ‘राजनीतिक रसूख’ भारी पड़ता है।



