रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई फौरी राहत नहीं मिली है। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 अप्रैल की तारीख तय की है।
दिल्ली में जोगी के वकील ने दी ये दलील
दिल्ली के गलियारों से मिली जानकारी के अनुसार, अमित जोगी की ओर से देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की। सिब्बल ने अदालत के सामने मजबूती से यह बात रखी कि हाई कोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना ही एकतरफा फैसला सुना दिया है। जोगी कैंप को उम्मीद थी कि आज गिरफ्तारी पर रोक लग जाएगी, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है। हालांकि, कोर्ट ने पहले यह भरोसा दिया था कि संरक्षण की अवधि खत्म होने से पहले वह याचिका पर विचार जरूर करेगा।
हाई कोर्ट के फैसले से पलटा पूरा मामला
दरअसल, यह पूरा विवाद तब गरमाया जब इसी महीने बिलासपुर हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया। बता दें कि निचली अदालत ने सालों पहले सबूतों की कमी बताकर अमित जोगी को बरी कर दिया था। जग्गी परिवार ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने गवाहों और साक्ष्यों की दोबारा बारीकी से जांच की और अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुना दी।
रायपुर से बस्तर तक सियासी सरगर्मी
जैसे ही यह खबर रायपुर पहुंची, सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सीएम साय ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे देर आए दुरुस्त आए जैसा बताया है। गौरतलब है कि अमित जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे हैं, इसलिए इस केस का असर सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ की राजनीति और आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।
अब आगे क्या?
अब सबकी नजरें 23 अप्रैल पर टिकी हैं। रायपुर के कचहरी चौक और वकीलों के चैंबर में बस यही चर्चा है कि क्या अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी या उन्हें सरेंडर करना होगा?



