West Bengal Election Record Voting: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी दंगल से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सालों से हिंसा और रीपोल (दोबारा मतदान) के लिए बदनाम रहे बंगाल में इस बार इतिहास बदल गया है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि इन दोनों राज्यों में हुए मतदान के बाद एक भी बूथ पर दोबारा वोटिंग कराने की जरूरत नहीं पड़ी है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए भी यह एक मिसाल बन गया है, जहां चुनावी सुरक्षा को लेकर हमेशा चर्चा रहती है।

92.9% वोटिंग ने उड़ाए होश, फिर भी शांति

खबर चौंकाने वाली इसलिए है क्योंकि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में करीब 92.9% मतदान दर्ज किया गया है। वहीं तमिलनाडु में भी वोटरों ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। सबसे बड़ी बात यह रही कि चुनाव से ठीक पहले वोटर लिस्ट की सफाई की गई और करीब 83 लाख फर्जी या संदिग्ध मतदाताओं को लिस्ट से बाहर कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो लिस्ट छोटी होने और वोटिंग प्रतिशत बढ़ने से यह साफ हो गया है कि इस बार केवल असली वोटर ही बूथ तक पहुंचा है।

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त्रिस्तरीय घेराबंदी

इस बार चुनाव आयोग ने कोई रिस्क नहीं लिया। बंगाल के हर पोलिंग बूथ पर थ्री-लेयर वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया गया था। इस सिस्टम ने फर्जी वोटिंग की गुंजाइश ही खत्म कर दी। पहले घेरे के तहत पोलिंग स्टेशन के 200 मीटर के दायरे में किसी भी बाहरी व्यक्ति की एंट्री बैन थी। दूसरे घेरे में बूथ के मेन गेट पर ही पहचान पत्र की मशीन से जांच की गई। वहीं तीसरे घेरे में वोट डालने से ठीक पहले मतदान कक्ष के अंदर अंतिम बार दस्तावेजों का मिलान। प्रशासन ने पूरे इलाके में धारा 163 लागू कर रखी थी, जिससे भीड़ जुटने और धांधली की हर कोशिश को नाकाम कर दिया गया।

क्या बदल गया इस बार?

पुराने चुनावों की याद करें तो बंगाल में बूथ कैप्चरिंग और हिंसा के चलते दर्जनों बूथों पर दोबारा वोटिंग आम बात थी। लेकिन इस बार चुनाव आयोग के सख्त रुख और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल ने तस्वीर बदल दी। रायपुर के राजनीतिक हलकों में भी इस बंगाल मॉडल की चर्चा हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर मतदाता सूची साफ हो और सुरक्षा के तीन घेरे हों, तो बड़ी से बड़ी गड़बड़ी रोकी जा सकती है।

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अब कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के चुनावों में भी यही थ्री-लेयर फॉर्मूला और वोटर लिस्ट की सख्ती देखने को मिलेगी।