महासमुंद। जिला महासमुंद में एलपीजी गैस की कालाबाज़ारी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि सुरक्षित रख-रखाव के लिए सुपुर्द किए गए 6 गैस कैप्सूल से करीब 400 मीट्रिक टन गैस अवैध रूप से निकाली गई, जिसकी कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह पूरा खेल मार्च के अंत से 6 अप्रैल 2026 के बीच सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। आरोप है कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक, डायरेक्टर और प्लांट मैनेजर ने मिलकर कैप्सूल में भरी गैस को धीरे-धीरे निकालकर अलग-अलग टैंकरों के माध्यम से बेचा।
GPS से पूरे खेल का हुआ खुलासा
कैप्सूल में लगे जीपीएस सिस्टम से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने हर गतिविधि को ट्रैक किया।
31 मार्च को 2 कैप्सूल
1 अप्रैल को 1 कैप्सूल
3 अप्रैल को 1 कैप्सूल
5 अप्रैल को 2 कैप्सूल
इस तरह कुल 6 कैप्सूल से गैस खाली की गई।
रिकॉर्ड में की भारी हेराफेरी
जब्त दस्तावेजों की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। रिकॉर्ड के अनुसार: अप्रैल में सिर्फ 47 टन गैस खरीदी गई। शुरुआती स्टॉक शून्य था, इसके बावजूद 70 टन से अधिक गैस की बिक्री दिखाई गई। यानी खरीदी से कई गुना ज्यादा गैस बेची गई, जो स्पष्ट रूप से चोरी और कालाबाज़ारी की ओर इशारा करता है।
कर्मचारियों ने खोला राज
प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने यह काम मालिक और मैनेजर के निर्देश पर किया। गैस को पहले प्लांट के बुलेट टैंक में खाली किया गया और बाद में निजी टैंकरों से अलग-अलग जगहों पर भेजा गया।
बिना बिल के सप्लाई
जांच में यह भी सामने आया है कि रायपुर और आसपास के इलाकों में 4 से 6 टन तक गैस कच्चे चालान (बिना पक्के बिल) के जरिए सप्लाई की गई। यह कार्य गैस संकट के समय सरकारी नियमों की खुली अवहेलना करते हुए किया गया।
पहले भी जब्त हुए थे कैप्सूल
जानकारी के मुताबिक, इन 6 गैस कैप्सूल को पहले सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन द्वारा सुपुर्दनामा में दिया गया था। बाद में इन्हीं कैप्सूल से गैस की चोरी कर ली गई।
एक आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में अब तक निखिल वैष्णव नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और मामले की गहराई से जांच जारी है।
महासमुंद का यह मामला न सिर्फ गैस की कालाबाज़ारी का बड़ा उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों का गबन किया जा रहा था। अब देखना होगा कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में और कितने बड़े नाम सामने आते हैं।



