टीआरपी। पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के निर्देशन में चलाए गए विशेष अभियान “ऑपरेशन तलाश” के तहत छत्तीसगढ़ पुलिस ने रिकॉर्ड सफलता हासिल करते हुए 4056 गुमशुदा लोगों को उनके परिजनों से मिलाया है। मात्र एक माह (01 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026) तक चले इस सघन अभियान में पुलिस ने 545 बच्चों और 3511 महिला-पुरुषों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की है।
छत्तीसगढ़ में गुमशुदा बच्चों और महिलाओं की बरामदगी पुलिस प्रशासन के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। “ऑपरेशन तलाश” की यह सफलता न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा बढ़ाती है, बल्कि मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों पर लगाम लगाने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम साबित हुई है।
देश के 10 राज्यों में पुलिस ने दी दबिश
अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य पुलिस की विशेष टीमों ने छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में जाकर सघन तलाशी ली। बाहरी राज्यों से कुल 182 गुमशुदा व्यक्तियों को रेस्क्यू कर वापस लाया गया, जिनमें 63 बालिकाएं और 103 महिलाएं शामिल हैं।
राज्य स्तर पर प्रदर्शन की बात करें तो दुर्ग जिले ने सर्वाधिक 683 लोगों को खोज निकाला, इसके बाद बिलासपुर से 648 और राजधानी रायपुर से 426 गुमशुदा लोगों की पतासाजी की गई। पुलिस मुख्यालय द्वारा तय किए गए नोडल अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों की सक्रियता ने इस एक महीने के टास्क को परिणामोन्मुख बनाया।
कुल बरामदगी: 4056 व्यक्ति (75 बालक, 470 बालिका, 972 पुरुष एवं 2539 महिलाएं)।
बच्चे: कुल 545 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित खोजा गया।
सर्वाधिक सफलता: दुर्ग (683), बिलासपुर (648) और रायपुर (426)।
बाहरी राज्य: 10 अन्य राज्यों से 182 लोगों की बरामदगी हुई।
छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुसार, इस अभियान की सफलता के बाद अब बरामद किए गए बच्चों और महिलाओं की काउंसलिंग कराई जा रही है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी समय-समय पर इस तरह के विशेष अभियान जारी रहेंगे ताकि अपराधों पर नियंत्रण और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।


