रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डीएमएफ घोटाले को लेकर दिल्ली से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है। वे पिछले दो साल से जेल में बंद थे।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि टुटेजा को और ज्यादा दिन जेल में रखना ठीक नहीं है। लेकिन कोर्ट ने उन्हें राहत देने के साथ ही कुछ ऐसी शर्तें लगा दी हैं, जिससे वे चाहकर भी छत्तीसगढ़ नहीं आ पाएंगे। रायपुर के प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले के बाद से ही हड़कंप मचा हुआ है।

कोर्ट ने कहा- गवाह 85 हैं, ट्रायल में लगेगा लंबा वक्त

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि अनिल टुटेजा 21 अप्रैल 2024 से लगातार न्यायिक हिरासत में हैं। इस केस के बाकी जितने भी सह-आरोपी थे, वे पहले ही जमानत पाकर बाहर घूम रहे हैं।

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अदालत ने एक जरूरी बात यह भी कही कि इस मामले में अभी करीब 85 गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है। अब इतने लोगों से पूछताछ में लंबा समय लगना तय है। कोर्ट का कहना था कि आरोप भले ही कितने भी गंभीर हों, लेकिन उनकी सच्चाई का फैसला तो ट्रायल पूरा होने के बाद ही होगा। तब तक किसी को जेल में बंद नहीं रखा जा सकता।

जेल से छूटेंगे, पर छत्तीसगढ़ की सीमा में नो एंट्री

सुप्रीम कोर्ट ने टुटेजा को जमानत तो दे दी, लेकिन उन पर कड़े पहरे भी बिठा दिए हैं। कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद अनिल टुटेजा छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा के अंदर कदम नहीं रख सकेंगे। उन्हें राज्य से बाहर ही रहना होगा।

ये शर्तें भी लागू होंगी

  • वे छत्तीसगढ़ के किसी भी मौजूदा या सेवारत सरकारी अधिकारी से कोई संपर्क नहीं करेंगे।
  • केस से जुड़े किसी भी गवाह को डराने, धमकाने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।
  • कोर्ट की इजाजत के बिना देश छोड़कर नहीं जा सकेंगे।
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क्या है DMF फंड?

डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन’ (DMF) फंड का पैसा मुख्य रूप से खनन (Mining) प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के लोगों के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कोरबा सहित कई जिलों में इस फंड के टेंडरों में भारी गड़बड़ी की गई। चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए अधिकारियों द्वारा लगभग 40% तक का मोटा कमीशन लिया गया। इसके अलावा, निजी कंपनियों से भी 15 से 20% तक की अवैध वसूली के आरोप हैं।

कानूनी कार्रवाई और जांच

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने धारा 120B (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत केस दर्ज किया है। इस मामले में पूर्व आईएएस रानू साहू समेत कई बड़े अधिकारियों पर पद के दुरुपयोग का आरोप है।