फलता। पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर आज सुबह से वोटों की गिनती जारी है। 21 मई को हुए पुनर्मतदान (Re-polling) के बाद आज उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होने वाला है। शुरुआती रुझानों में यहां बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। काउंटिंग शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़कर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं।
29 अप्रैल को हुई थी गड़बड़ी, चुनाव आयोग ने बैठाई थी जांच
आपको बता दें कि फलता सीट पर पहले 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे। लेकिन उस दौरान कई पोलिंग बूथों से गंभीर शिकायतें सामने आईं। जांच में पता चला कि कुछ शरारती तत्वों ने ईवीएम (EVM) के बटन पर इत्र जैसा पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगा दी थी। हद तो तब हो गई जब मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों के फुटेज से भी छेड़छाड़ की कोशिश पकड़ी गई। इसके बाद इलेक्शन कमीशन (Election Commission) ने सख्त रुख अपनाते हुए पीठासीन अधिकारियों और चुनाव पर्यवेक्षकों की भूमिका पर सवाल उठाए और दोबारा चुनाव कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
टीएमसी के जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर छोड़ा मैदान
इस चुनाव में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर उम्मीदवार जहांगीर खान ने दोबारा वोटिंग से ठीक पहले अचानक चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया। हालांकि, तकनीकी कारणों से उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा, लेकिन टीएमसी ने इसे उनका निजी फैसला बताया।
जहांगीर खान के पीछे हटने के बाद अब मुख्य मुकाबला मुख्य रूप से तीन चेहरों के बीच सिमट गया है। इनमें देबांग्शु पांडा (बीजेपी), अब्दुल रजाक मोल्ला (कांग्रेस), शंभू नाथ कुर्मी (सीपीआईएम) शामिल है।
दोबारा वोटिंग में जनता ने दिखाया दम, हुआ 86% मतदान
पिछले विवादों के बाद इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। डर और तनाव के माहौल के बावजूद 21 मई को जब दोबारा वोटिंग (West Bengal Elections) हुई, तो जनता ने लोकतंत्र के पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। फलता सीट पर रिकॉर्ड तोड़ 86 फीसदी से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया था। भारी वोटिंग के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि जनता किसी बड़े बदलाव के मूड में है, जो आज के रुझानों में साफ दिखने लगा है।



