टीआरपी डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो रविवार को भारत पहुंचे। यहां उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक बेहद अहम द्विपक्षीय वार्ता की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण तकनीक, Critical Technology और लोगों के आपसी संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने पर गहन चर्चा हुई।

यह दौरा रणनीतिक मोर्चे पर इसलिए भी खास है, क्योंकि रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर के दौरे पर रहेंगे और मंगलवार को वापस दिल्ली लौटकर क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे।

बैठक के बाद आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए कहा भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। यही साझा लोकतांत्रिक मूल्य और हित दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। रणनीतिक साझेदारी केवल एक सामान्य रिश्ता नहीं है, बल्कि यह वह मंच है जहां दो देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशते हैं।

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भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत को बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने साफ किया कि भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के मजबूत राष्ट्रीय हितों पर टिकी हुई है। जयशंकर ने जानकारी दी कि मार्को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की है। दोनों नेताओं के बीच कई अहम वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई, जिनमें यूक्रेन संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभाव, पश्चिम एशिया (Middle East) के मौजूदा हालात, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की सुरक्षा स्थिति चर्चा

जयशंकर ने इस बात पर भी खुशी जताई कि मार्को रूबियो के कार्यभार संभालने के पहले ही दिन से दोनों देश लगातार संपर्क में हैं, जिससे रिश्तों को एक नई सक्रियता मिली है।

राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को भारत-अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से चल रही हल्की तल्खी को दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। करीब पांच सप्ताह पहले ही भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने वाशिंगटन का दौरा किया था, जिसका मकसद दोनों देशों के सहयोग को एक स्थिर पटरी पर लाना था। रूबियो की इस यात्रा से साफ है कि दोनों देश पुरानी कड़वाहट को भुलाकर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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