रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोमनी में नाबालिग किशोरी के मामले को लेकर डॉक्टरों में आक्रोश है। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI) छत्तीसगढ़ चैप्टर ने महिला चिकित्सकों का समर्थन करते हुए शासन से राज्य स्तरीय स्पष्ट गाइडलाइन और SOP जारी करने की मांग की है।

नाबालिग किशोरी के इलाज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अमीनोरिया की शिकायत पर जांच के दौरान प्रेगनेंसी किट खराब होने से तीन बार गलत रिपोर्ट आई। डॉक्टरों ने किशोरी को उच्च केंद्र रेफर कर MLC बनाकर पुलिस को सूचना दी।

एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI) छत्तीसगढ़ चैप्टर डॉक्टरों के समर्थन में उतरा है। अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि सीमित संसाधनों में 2 महिला डॉक्टर 24 घंटे आपातकालीन सेवा दे रही हैं, जबकि CHC में 8 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं।

पुरुष DSP की पूछताछ पर तीखी आपत्ति

डॉ. गुप्ता ने पुरुष DSP द्वारा दो महिला डॉक्टरों को बिना समन थाने बुलाकर 3 घंटे पूछताछ करने को अमानवीय और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि इससे डॉक्टरों में भय और असुरक्षा का माहौल है। उन्होंने मांग की कि महिला डॉक्टरों से पूछताछ में महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य हो।

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10 बिंदुओं पर मांगी गई राज्य स्तरीय गाइडलाइन

AHPI ने शासन से मेडिको-लीगल मामलों में राज्य स्तरीय गाइडलाइन जारी करने की मांग की। प्रमुख बिंदु:

1. नाबालिग/अविवाहित में अमीनोरिया पर कौन सी जांच अनिवार्य?
2. UPT पॉजिटिव पर पुलिस को सूचना देना जरूरी है या नहीं?
3. प्रेगनेंसी की पुष्टि किस जांच से हो?
4. नाबालिग में प्रेगनेंसी जांच का अधिकार किसे?
5. गर्भपात की दवा के केस में क्या प्रक्रिया?
6. जलने/जहरखुरानी में संदेह पर MLC बनाना उचित है या नहीं?
7. कौन से केस मेडिको-लीगल माने जाएं?
8. पुलिस को सूचना भेजने के बाद पावती लेना किसकी जिम्मेदारी?
9. किन बीमारियों में कौन सी जांच लिखें ताकि अनावश्यक जांच का आरोप न लगे?
10. Provisional/Suspected Diagnosis पर इलाज उचित है या नहीं?

AHPI की सरकार से 3 बड़ी मांग

1. सोमनी CHC की महिला डॉक्टरों पर कोई प्रतिकूल कार्रवाई न हो।
2. महिला डॉक्टरों से पूछताछ में महिला पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
3. डॉक्टरों के लिए व्यावहारिक और कानूनसम्मत SOP जारी कर भयमुक्त माहौल दिया जाए।डॉ. गुप्ता ने कहा कि स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से डॉक्टर अनिश्चितता और मानसिक तनाव में रहते हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।

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