कांकेर। जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के ग्राम ईरागांव में धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर सूचना बोर्ड लगा दिया गया है। इसमें ईसाई धर्म प्रचारक पादरी और पास्टरों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध की जानकारी दी गई है। ग्रामीणों के अनुसार यह निर्णय ग्रामसभा में चर्चा के बाद लिया गया।
शव दफनाने को लेकर हुआ था विवाद
कुछ दिन पहले एक महिला की मौत के बाद शव दफनाने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद यह निर्णय सामने आया। ग्रामीणों का कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद कुछ लोग गांव की परंपराओं, पूजा पद्धति, देवी देवताओं और सामाजिक व्यवस्थाओं से दूरी बना लेते हैं। इससे विवाद की स्थिति बनती है। इसी को देखते हुए ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित किया गया। धर्मांतरण गतिविधियों के उद्देश्य से आने वाले पादरी पास्टरों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।
ग्रामसभा के दौरान ग्राम पटेल प्रयाग सिंह कोरेटी, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र टेकाम, भागवत कोरेटी, मयाराम आंचला, पुखराज आंचला, गैंद सिंह हिडको, ज्वाला प्रसाद जैन, चैतू आंचला, बालसिंह कोरेटी, गौतम उसेण्डी और अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
हेटारकसा में 20 साल बाद घर वापसी
भानुप्रतापपुर के ग्राम हेटारकसा में कोसरिया गांडा गंधर्व समाज की बैठक में परशुराम टांडिया और उनका परिवार करीब 20 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे थे। वे समाज की बैठक में पहुंचे और मूल रूप से वापसी के लिए समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों को आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि हम सभी सदस्य ईसाई धर्म छोड़कर फिर से अपने मूल हिंदू धर्म में वापसी करना चाहते हैं।

पारंपरिक रीति रिवाज से स्वागत
समाज के लोगों ने वापसी के लिए पारंपरिक पूजा पाठ और शुद्धिकरण की रस्में कीं। कोरर क्षेत्र के हेटारकसा कोसरिया गोंड गंधर्व समाज के कई लोग करीब 20 वर्षों से ईसाई धर्म से जुड़े थे। उन्होंने समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में फिर से अपने पारंपरिक आदिवासी हिंदू रीति रिवाज अपना लिए। मूल धर्म में वापसी से परिवार के सदस्यों में खुशी की लहर देखने को मिली। गांव के लोगों ने भी रीति रिवाज निभाते हुए मूल रूप से वापस आए सभी परिवारों का जोर शोर से स्वागत किया।



