रायपुर। एमसीबी जिले के खड़गवां में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में भ्रष्टाचार के आरोपों को महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने खारिज कर दिया है। विभागीय जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई। उधर जिला प्रशासन ने इस मामले में पूरी सफाई दी है।
क्या था मामला..?
सोशल मीडिया पर खड़गवां विकासखंड में 10 फरवरी 2026 को हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। 184 जोड़ों का विवाह कराया गया था। आरोप था कि सामग्री की गुणवत्ता खराब थी और पैसे का दुरुपयोग हुआ। विवाह में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें मंगलसूत्र चांदी की जगह गिल्ट का दिया गया है।
मंत्री ने कहा- नियमों के तहत हुआ आयोजन
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम कर रही है। जांच में साफ हुआ कि योजना का संचालन नियमों के अनुसार हुआ। आमजन से अपील है कि जानकारी की सत्यता आधिकारिक स्रोतों से परखें।
जिला प्रशासन ने क्या कहा..?
एमसीबी जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि कुछ महिलाओं द्वारा यह दावा किया गया है कि उन्हें मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 10 फरवरी 2026 को चनवारीडांड, खड़गवां (जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में प्रदान किया गया। मंगलसूत्र “गिलेट“ का था तथा इसकी सामग्री के विरुद्ध 15 हजार रुपये भुगतान किए जाने का भी दावा किया गया है।
इस संबंध में वस्तुस्थिति निम्नानुसार हैः- 10 फरवरी 2026 को खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत कुल 184 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रति कन्या 50,000 रुपये की स्वीकृत राशि के अनुसार लाभ प्रदान किया गया। योजनांतर्गत प्रत्येक कन्या के बैंक खाते में 35,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि आरटीजीएस के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई।
शेष 15,000 रुपये की राशि से सामूहिक विवाह आयोजन की व्यवस्थाएं एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिसमें भवन किराया, भोजन एवं नाश्ता, टेंट, बैठक व्यवस्था, परिवहन, प्रमाण-पत्र तथा वर-वधु हेतु वस्त्र, जूते-चप्पल, चुनरी, साफा, मंगलसूत्र एवं अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल थी।
मंगलसूत्र के लिए 1000 रुपए अलग से दिए
यह उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के पत्र क्रमांक एफ-3-41/2012/मबावि/50 दिनांक 14 जनवरी 2013 के बिंदु 2.1 के अनुसार मंगलसूत्र में चांदी का होना अनिवार्य नहीं है। इसी कारण उपलब्ध वित्तीय सीमा एवं बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए योजना के अंतर्गत कृत्रिम (आर्टिफिशियल) मंगलसूत्र क्रय कर हितग्राहियों को प्रदान किया गया था। बाद में प्रदायित मंगलसूत्रों की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित फर्म के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र 1,000 रुपये की कटौती की गई तथा यह राशि सीधे संबंधित वधुओं के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी गई।
परिणामस्वरूप प्रत्येक पात्र कन्या को कुल 36,000 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, जबकि शेष राशि विवाह आयोजन एवं आवश्यक सामग्री पर नियमानुसार व्यय की गई।
अतः यह स्पष्ट किया जाता है कि 10 फरवरी 2026 को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में किसी प्रकार की वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता नहीं की गई। संपूर्ण आयोजन शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों, वित्तीय प्रावधानों एवं भंडार क्रय नियमों का पालन करते हुए संपन्न कराया गया।



