टीआरपी डेस्क। दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के पास भी भूकंप की पहले से एकदम सटीक भविष्यवाणी करने वाली कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है. लेकिन भारत ने अब हिमालय के पहाड़ी इलाकों में एक ऐसा एडवांस सेंसर नेटवर्क तैयार कर लिया है, जो भूकंप शुरू होते ही सक्रिय हो जाता है. यह सिस्टम खतरनाक और विनाशकारी झटके इंसानी बस्तियों तक पहुंचने से कुछ सेकंड पहले ही लोगों को सचेत कर सकता है. इस दिशा में आईआईटी रुड़की ने उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर एक बड़ा काम किया है. दोनों ने मिलकर भूदेव नाम का एक खास भूकंप पूर्व चेतावनी ऐप तैयार किया है, जो स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक की मदद से काम करता है.
शुरुआती तरंगों को पकड़ लेते हैं सेंसर
इस तकनीक के काम करने के तरीके को आसान भाषा में समझें तो जब भी धरती के नीचे कोई हलचल या भूकंप आता है, तो उसमें से सबसे पहले पी-वेव्स (प्राइमरी वेव्स यानी शुरुआती तरंगें) निकलती हैं. ये तरंगें बहुत तेज रफ्तार से चलती हैं और इनसे कोई नुकसान नहीं होता. वैज्ञानिक भाषा में कहें तो नुकसान पहुंचाने वाली मुख्य तरंगों से पहले ये शांत तरंगें चलती हैं. सरकार ने उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं जैसे संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में जमीन के अंदर खास सेंसर लगाए हैं. जैसे ही ये सेंसर इन शुरुआती पी-वेव्स को पकड़ते हैं, ये तुरंत दूर स्थित शहरों में बने कंट्रोल रूम को संदेश भेज देते हैं. इससे खतरनाक झटके आने से पहले लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर जाने के लिए कुछ कीमती सेकंड मिल जाते हैं.
दूरी पर निर्भर करेगा चेतावनी का समय
इस सिस्टम से मिलने वाली चेतावनी का समय इस बात पर निर्भर करता है कि आप भूकंप के मुख्य केंद्र (एपिसेंटर) से कितनी दूरी पर हैं. अगर कोई इलाका भूकंप के केंद्र के बिल्कुल पास है, तो वहां अलर्ट के लिए बहुत कम समय मिलेगा. वहीं, केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित शहरों को संभलने के लिए थोड़ा ज्यादा वक्त मिल जाता है. फिलहाल दुनिया में जापान, ताइवान और अमेरिका के पास इस तरह की सबसे बेहतरीन प्रणालियां मौजूद हैं. भारत भी अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है ताकि आने वाले समय में जान-माल के नुकसान को कम से कम किया जा सके.



