बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बीते कुछ महीनों में आवारा कुत्तों के हमलों और डॉग बाइट की घटनाओं ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि आवारा पशुओं का प्रबंधन सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रह सकता। यह सीधे तौर पर जनता की सुरक्षा से जुड़ा विषय है, इसलिए धरातल पर ठोस काम दिखना चाहिए।
Dog sterilization: कोर्टस्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और केंद्र सरकार के एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम 2023 का अक्षरश: पालन किया जाए। इसके लिए सभी संबंधित विभागों, नगरीय निकायों और जिला प्रशासन को एकजुट होकर काम करना होगा और इसकी जिम्मेदारी मुख्य सचिव को सौंपी गई है।
6 महीने में बढ़ी रफ्तार, 6 से 34 हुए एबीसी सेंटर: राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने विस्तृत शपथपत्र पेश कर बताया कि जनवरी से जून 2026 के बीच आवारा कुत्तों के प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम हुआ है। दिसंबर 2025 तक पूरे प्रदेश में केवल 6 एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर ही काम कर रहे थे। लेकिन इस साल के पहले छह महीनों में 28 नए केंद्र शुरू किए गए। अब राज्य में कुल 34 ABC सेंटर संचालित हैं। राहत की बात यह है कि 32 जिलों में कम से कम एक केंद्र अब उपलब्ध है। केवल गरियाबंद जिले में केंद्र का निर्माण अभी चल रहा है।
Dog sterilization:राज्य शासन ने बताया कि इन केंद्रों के जरिए नसबंदी अभियान को भी गति मिली। 30 जून 2026 तक राज्यभर में 30 हजार 651 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। साथ ही 50 हजार 362 कुत्तों को एंटी-रेबीज का टीका लगाया गया और 42 हजार 263 कुत्तों का डी-वॉर्मिंग किया गया। यानी बीमारी रोकथाम और संख्या नियंत्रण दोनों पर एक साथ काम हो रहा है।
शेल्टर से लेकर सड़कों तक कसी गई कमर: सिर्फ नसबंदी ही नहीं, बल्कि कुत्तों को पकड़ने और रखने की व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है। प्रदेश में अब 199 डॉग शेल्टर बनाए जा चुके हैं, जिनमें एक साथ 4 हजार 340 कुत्तों को रखा जा सकता है। इनके संचालन के लिए 462 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 39 डॉग कैचिंग वाहन, 347 पकड़ने वाले जाल, 366 केनेल और 827 कर्मी मैदान में उतारे गए हैं।
आवारा कुत्तों की अधिकता वाले सड़क चिन्हित: आवारा पशुओं की वजह से सड़कों पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। राज्य में ऐसे 251 सड़क मार्ग चिन्हित किए गए हैं जहां आवारा पशुओं की आवाजाही सबसे ज्यादा है। इन जगहों पर 644 पेट्रोलिंग टीमें, 28 एंबुलेंस और 7 क्रेन बचाव कार्य के लिए 24 घंटे तैनात की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार कुत्तों को खाना खिलाने के लिए 2 हजार 593 स्थान भी निर्धारित किए गए हैं ताकि लोग सड़क किनारे खाना न फेंकें।
स्कूलों को बनाया गया प्राथमिकता, हेल्पलाइन पर मिली हजारों शिकायतें: बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 51 हजार 160 सार्वजनिक संस्थानों को चिन्हित किया है। इसमें 45 हजार 918 सरकारी और निजी स्कूल शामिल हैं। इनमें से 49 हजार 458 संस्थानों में सूचना बोर्ड लगा दिए गए हैं और नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। 44 हजार 204 स्कूल परिसरों को बाउंड्री वॉल, फेंसिंग और गेट से सुरक्षित किया जा चुका है। निगरानी के लिए 1 हजार 424 निरीक्षण अधिकारियों की नियुक्ति हुई है और 31 मई तक 3 हजार 797 संस्थानों का भौतिक सत्यापन भी हो चुका है।
नागरिकों की शिकायतों के लिए नगरीय प्रशासन विभाग की ‘निदान’ हेल्पलाइन 1100 और NHAI की 1033 सेवा शुरू की गई है। 30 जून तक इन नंबरों पर 9 हजार 45 शिकायतें आईं, जिनमें से 8 हजार 895 का समाधान किया जा चुका है। इसी अवधि में राष्ट्रीय राजमार्गों से 1 लाख 53 हजार 351 आवारा मवेशियों को भी हटाया गया।
करोड़ों का बजट और गौशालाओं का विस्तार: इस पूरे अभियान के लिए सरकार ने 33.98 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इसमें पशु चिकित्सा विभाग को 3.98 करोड़, जबकि नगरीय प्रशासन विभाग को इस साल 10 करोड़ और अगले साल के लिए 20 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। पशुओं के लिए आश्रय भी बढ़ाए जा रहे हैं। अभी राज्य में 137 गौशालाएं और 421 पशु आश्रय स्थल चल रहे हैं। इसके अलावा 100 नए गोधाम बनाने की मंजूरी दी गई है, जिनमें से 28 शुरू भी हो चुके हैं।
अब हर जिले का अलग-अलग ब्यौरा मांगा: सुनवाई के अंत में हाईकोर्ट ने अगली तारीख पर सरकार से जिलावार विस्तृत शपथपत्र मांगा है। अब सरकार को यह बताना होगा कि हर जिले में कितने ABC सेंटर और डॉग शेल्टर हैं, वहां कितनी नसबंदी और टीकाकरण हुआ, स्कूल कितने सुरक्षित किए गए और हेल्पलाइन की शिकायतों का क्या हुआ। कोर्ट ने कहा कि जब तक हर जिले की जमीनी रिपोर्ट नहीं आएगी, तब तक निगरानी जारी रहेगी।
FAQ:
सवाल 1: आवारा कुत्तों के लिए स्थापित ABC क्या कम करते हैं?
जवाब: आवारा कुत्तों के लिए स्थापित ABC याने Animal Birth Control पशु जन्म नियंत्रण केंद्र और कार्यक्रम मुख्य रूप से कुत्तों की आबादी और उनसे जुड़े खतरों को नियंत्रित करते हैं।
ABC के जरिए नसबंदी (स्टरलाइज़ेशन) के माध्यम से आवारा कुत्तों की अनियंत्रित आबादी और प्रजनन दर को कम किया जाता है। वहीं रेबीज रोधी टीकाकरण (एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन) करके इंसानों और जानवरों में जानलेवा बीमारी फैलने के जोखिम को कम किया जाता है।
सवाल 2: छत्तीसगढ़ में अभी कितने ABC सेंटर काम कर रहे हैं?
जवाब: जून 2026 तक राज्य में 34 ABC सेंटर संचालित हैं। 6 महीने पहले यह संख्या सिर्फ 6 थी। 32 जिलों में कम से कम एक केंद्र है, गरियाबंद में निर्माण चल रहा है।
सवाल 3: अगर किसी इलाके में आवारा कुत्तों से परेशानी हो तो शिकायत कहां करें?
जवाब: शहरी क्षेत्र के लिए नगरीय प्रशासन की ‘निदान’ हेल्पलाइन 1100 और राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए 1033 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।


