छत्तीसगढ़ के प्राचीन शिव मंदिर भोरमदेव की ऐतिहासिक वास्तुकला
कबीरधाम जिले में स्थित 11वीं शताब्दी का ऐतिहासिक भोरमदेव शिव मंदिर।

Chhattisgarh ke Shiv Mandir: छत्तीसगढ़ में पौराणिक काल से स्थापित प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था, इतिहास और अनूठी वास्तुकला का केंद्र बने हुए हैं। राज्य के कबीरधाम, गरियाबंद, दुर्ग और बिलासपुर जिलों में स्थित ये देवालय सदियों पुरानी समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हैं। कवर्धा के भोरमदेव, गरियाबंद के भूतेश्वरनाथ, राजिम के कुलेश्वर महादेव, देवबलोदा और तालाग्राम के शिव धामों में वर्षभर दर्शनार्थियों और शोधकर्ताओं का आवागमन बना रहता है। नागवंश, कलचुरी और शरभपुरीय राजवंशों के शासनकाल में निर्मित ये स्थल आज भी अपनी पौराणिक प्रासंगिकता और सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए हैं।

सांस्कृतिक दृष्टि से ख़ास है छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के ये शिव मंदिर केवल पत्थरों के ढांचे नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की सांस्कृतिक रीढ़ हैं। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में प्रदेश के कई स्थानों पर विशाल मेलों का आयोजन होता है, जहाँ छत्तीसगढ़िया संस्कृति के लोक नृत्य (पंथ, सुआ, कर्मा) और भजनों की गूंज सुनाई देती है। हाल के वर्षों में, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने इन ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पटल पर लाने के लिए कई प्रयास किए हैं ताकि इतिहास और वास्तुकला के प्रेमी इन चमत्कारों को करीब से देख सकें। आइये जानते है छत्तीसगढ़ के शिव मंदिरों के बारे में-

भोरमदेव मंदिर
कबीरधाम (कवर्धा) जिले में हरी-भरी मैकल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे चमकीला पन्ना है। 11वीं शताब्दी में नागवंशी राजा रामचंद्र देव द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी नागर शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, गोंड जनजाति के लोग भगवान शिव को ‘भोरमदेव’ के नाम से पूजते थे। इसी कारण इस मंदिर का नाम भोरमदेव पड़ा। मंदिर के बाहरी पत्थरों पर उकेरी गई कामुक और नृत्य करती मूर्तियां मध्य प्रदेश के खजुराहो और ओडिशा के कोणार्क मंदिर की याद दिलाती हैं। पाँच फीट ऊँचे चबूतरे पर बने इस मंदिर के गर्भगृह में एक प्राचीन शिवलिंग के साथ-साथ भगवान विष्णु के अवतारों और काल भैरव की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।

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कुलेश्वर महादेव
गरियाबंद जिले में स्थित राजिम को छत्तीसगढ़ का ‘प्रयाग’ कहा जाता है। यहाँ महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का पवित्र त्रिवेणी संगम होता है। इसी संगम के ठीक बीचों-बीच स्थित है ऐतिहासिक कुलेश्वर महादेव मंदिर। इस मंदिर की कहानी रामायण काल से जुड़ती है। माना जाता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी इस क्षेत्र से गुजरे थे। यहाँ त्रिवेणी संगम पर स्नान करने के बाद माता सीता ने अपने हाथों से रेत (बालू) का एक शिवलिंग बनाया और उसकी पूजा की। इस मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में हुआ था। अष्टकोणीय चबूतरे पर बने इस मंदिर की बनावट इतनी वैज्ञानिक है कि सदियों से महानदी में आने वाली विनाशकारी बाढ़ भी इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकी है।

भूतेश्वरनाथ
गरियाबंद जिले के घने जंगलों के बीच स्थित मरौदा गाँव में प्रकृति का एक ऐसा चमत्कार है, जिसे देखकर आधुनिक विज्ञान भी हैरान है। यहाँ स्थित ‘भूतेश्वरनाथ’ को दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है। इस शिवलिंग की सबसे अनोखी बात यह है कि इसकी ऊँचाई और चौड़ाई हर साल अपने आप बढ़ जाती है। राजस्व विभाग की टीम द्वारा समय-समय पर की जाने वाली मैपिंग में भी इस बात की पुष्टि हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, सदियों पहले यहाँ के जमींदार को घने जंगलों के बीच से किसी बैल के रंभाने या शेर की दहाड़ जैसी आवाजें सुनाई देती थीं। जब ग्रामीणों ने खोज की, तो उन्हें यहाँ एक छोटा सा शिवलिंग मिला, जिसने आज एक विशाल पर्वतखंड का रूप ले लिया है। सावन के महीने में यहाँ लाखों कांवड़िए जल चढ़ाने पहुँचते हैं।

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देवबलोदा का शिव मंदिर
दुर्ग जिले के देवबलोदा में स्थित 13वीं शताब्दी का शिव मंदिर अपनी वास्तुकला से ज्यादा अपनी रहस्यमयी लोककथाओं के लिए जाना जाता है। कलचुरी कालीन राजाओं के समय लाल पत्थरों से बने इस मंदिर की नक्काशी देखने लायक है। किंवदंती है कि इस मंदिर का निर्माण एक शिल्पकार कर रहा था, जिसके हाथ में छह उंगलियां थीं। उसने कसम खाई थी कि जब तक मंदिर पूरा नहीं होगा, वह कपड़े नहीं बदलेगा। एक दिन जब वह मंदिर के शिखर पर कलश रख रहा था, उसकी पत्नी खाना लेकर आई। लाज के मारे शिल्पकार ने पास के जलकुंड में छलांग लगा दी। इस कारण मंदिर आज भी बिना कलश के (अधूरा) है। मंदिर के पास एक प्राचीन बावड़ी (कुंड) है, जिसका पानी कभी नहीं सूखता। कहा जाता है कि इस कुंड के भीतर एक गुप्त सुरंग है जो सीधे आरंग (रायपुर) की ओर जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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Q. छत्तीसगढ़ का खजुराहो किस मंदिर को कहा जाता है?
उत्तर: कबीरधाम (कवर्धा) जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर को अपनी अनूठी नागर शैली और कामुक शिल्पकला के कारण छत्तीसगढ़ का ‘खजुराहो’ कहा जाता है।

Q. विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहाँ स्थित है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मरौदा गाँव में स्थित ‘भूतेश्वरनाथ’ को विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है।

Q. कुलेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?
उत्तर: कुलेश्वर महादेव मंदिर राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम पर स्थित है। इसका संबंध पौराणिक परंपराओं से जोड़ा जाता है।

Q. देवबलोदा का शिव मंदिर किस काल का माना जाता है?
उत्तर: दुर्ग जिले के देवबलोदा में स्थित प्राचीन शिव मंदिर 13वीं शताब्दी का है, जो कलचुरी कालीन वास्तुकला का सुंदर उदाहरण है।