सीपत/बिलासपुर। 60 लाख रुपये की लागत से बना सीपत का नवीन तहसील भवन उद्घाटन से पहले ही विवादों में घिर गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा निर्मित इस भवन में छत तक जाने के लिए स्थायी सीढ़ी तक नहीं बनाई गई है। वहीं पहली बारिश में ही छत टपकने लगा और दीवारों में दरारें भी नजर आने लगी हैं।
कलेक्टर के निर्देश के बावजूद वॉटरप्रूफिंग नहीं कराए जाने से सरकारी निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे बड़ी चूक: छत तक जाने की सीढ़ी ही नहीं
तहसील जैसी महत्वपूर्ण शासकीय इमारत में छत तक पहुंचने का कोई स्थायी रास्ता नहीं रखा गया। भविष्य में छत की मरम्मत, निरीक्षण या रखरखाव के लिए कर्मचारियों को अस्थायी लोहे या लकड़ी की सीढ़ी लगानी पड़ेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह साफ तौर पर डिजाइन स्तर की लापरवाही है। सवाल उठ रहा है कि क्या इंजीनियर से गलती हुई या लागत बचाने के लिए सीढ़ी का प्रावधान ही हटा दिया गया।

पहली बारिश में ही शुरू हो गया रिसाव
भवन का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन पहली ही बारिश में छत कई जगहों से टपकने लगी है। कमरों में पानी रिस रहा है और दीवारों में दरारें भी दिख रही हैं।
अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो तहसील और न्यायालय के महत्वपूर्ण दस्तावेजों के खराब होने का खतरा है। निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कलेक्टर के आदेश को भी किया नजरअंदाज
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 10 जुलाई 2025 को भवन का निरीक्षण किया था। उस समय भी छत से पानी टपकने की शिकायत मिली थी। कलेक्टर ने हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों को तुरंत वॉटरप्रूफिंग कराने के निर्देश दिए थे,
लेकिन विभाग ने उस निर्देश पर काम नहीं किया। नतीजा ये कि इस साल फिर बारिश में छत टपक रही है। अब सवाल ये है कि जिला प्रशासन के स्पष्ट आदेश के बाद भी सुधार कार्य क्यों नहीं हुआ।

उद्घाटन टला, अब 15 अगस्त से पहले की तैयारी
भवन का उद्घाटन 5 मई को केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में होना था। टेंट लग चुके थे, कार्ड भी छप गए थे। लेकिन उद्घाटन से एक दिन पहले कार्यक्रम अचानक स्थगित कर दिया गया।
अब अधिकारियों की तैयारी है कि 15 अगस्त से पहले किसी तरह भवन का उद्घाटन कर दिया जाए।
निर्माण एजेंसी ने साधी चुप्पी
इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, बिलासपुर संभाग की कार्यपालन अभियंता जूही श्रीवास्तव से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
अब उठ रहे 4 बड़े सवाल
1. 60 लाख की इमारत में छत तक सीढ़ी का प्रावधान क्यों नहीं रखा गया ?
2. कलेक्टर के निर्देश के बाद भी वॉटरप्रूफिंग अधूरी क्यों रही
3. निर्माण की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है
4. पूरे निर्माण की तकनीकी जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या नहीं
इन खामियों ने न सिर्फ निर्माण एजेंसी बल्कि पूरी विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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FAQ: सीपत तहसील भवन निर्माण खामियां
सवाल 1: भवन कहां और कितनी लागत से बना?
सीपत तहसील परिसर, बिलासपुर में। निर्माण लागत लगभग 60 लाख रुपये। निर्माण एजेंसी छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल है।
सवाल 2: भवन में सबसे बड़ी खामी क्या है
इमारत में छत तक जाने के लिए स्थायी सीढ़ी नहीं बनाई गई। साथ ही पहली बारिश में ही छत टपकने और दीवारों में दरारें आ पर आईगईं।
सवाल 3: कलेक्टर ने क्या निर्देश दिए थे ?
10 जुलाई 2025 को कलेक्टर संजय अग्रवाल ने निरीक्षण के दौरान तत्काल वॉटरप्रूफिंग कराने को कहा था। लेकिन निर्देश का पालन नहीं हुआ।
सवाल 4: उद्घाटन कब होना था ?
5 मई को प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में स्थगित हो गया। अब 15 अगस्त से पहले उद्घाटन की तैयारी है।
सवाल 5: अब आगे क्या होगा ?
निर्माण की खामियों को लेकर तकनीकी जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।


