CG News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को रायपुर स्थित मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य में ‘विकसित भारत जी राम जी योजना’ के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि देश में 1 जुलाई 2026 से लागू हुई यह महत्वाकांक्षी योजना केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे, जल संरक्षण और कृषि आजीविका को मजबूत बनाने का एक बड़ा जरिया बनेगी। केंद्र सरकार के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। योजना के तहत प्रदेश के पंजीकृत श्रमिकों को साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है, साथ ही दैनिक मजदूरी में ₹39 की बढ़ोतरी कर इसे ₹300 प्रतिदिन कर दिया गया है।
पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में योजना के संचालन के लिए राज्य के अंश सहित कुल ₹5191 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे पहले शुरुआती तीन महीनों में ₹1264 करोड़ के रोजगार गारंटी कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इस प्रकार छत्तीसगढ़ को चालू वित्त वर्ष के लिए कुल ₹6855 करोड़ की राशि मिल रही है, जो राज्य के इतिहास में ग्रामीण विकास के लिए अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश है। केंद्र सरकार द्वारा प्रथम किस्त के रूप में ₹1538.93 करोड़ की राशि जारी भी कर दी गई है। इस योजना के अंतर्गत गांवों में कुल 318 तरह के काम कराए जाएंगे, जिन्हें चार मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें जल सुरक्षा व संरक्षण के 107 काम, ग्रामीण अधोसंरचना के 90 काम, आजीविका संवर्धन के 86 काम और आपदा प्रबंधन व जलवायु अनुकूलन से जुड़े 35 प्रकार के कार्य शामिल हैं।
कृषि सीजन का ध्यान और 26 जनवरी तक 3 विशेष अभियानों पर जोर
योजना की एक प्रमुख विशेषता यह है कि खेती-किसानी के मौसम को ध्यान में रखते हुए वर्ष में दो महीने यह योजना बंद रहेगी, ताकि किसानों को कृषि कार्यों के लिए आसानी से मजदूर मिल सकें और खेती का काम प्रभावित न हो। इसके साथ ही राज्य सरकार ने 26 जनवरी 2027 तक तीन बड़े विशेष अभियानों को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। पहला अभियान ‘मेरी बेटी मेरा अभिमान’ 15 अगस्त से शुरू होगा, जिसके तहत 6,671 सरकारी स्कूलों में ₹286.85 करोड़ की लागत से बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। दूसरा अभियान मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय निर्माण का है, जिसमें पूरे प्रदेश के गांवों में ₹18.22 करोड़ की लागत से 6,534 मुक्तिधाम और शेड बनाए जाएंगे। तीसरा अभियान ‘मोर गांव मोर पानी’ है, जिसके तहत 10,027 सूखे हैंडपंपों को ₹52.14 करोड़ की लागत से रिचार्ज करने का काम किया जाएगा।
मजदूरी का अग्रिम भुगतान और बकाए की त्वरित निकासी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रेस वार्ता में उपस्थित गृहमंत्री विजय शर्मा, पंचायत विभाग की अपर मुख्य सचिव (ACS) रिचा शर्मा और योजना के आयुक्त का स्वागत करते हुए मजदूरों के हितों पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी व्यवस्था के विपरीत अब सरकार के पास बजट की अग्रिम राशि उपलब्ध है, इसलिए मजदूरी के भुगतान में किसी भी प्रकार का विलंब नहीं होगा। पूर्व के ₹450 करोड़ के बकाया भुगतान में से ₹395 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है और शेष बकाए का निपटारा एक सप्ताह के भीतर कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी ग्राम पंचायतों से अपील की है कि वे तीनों प्रमुख अभियानों से संबंधित कार्यों के प्रस्ताव तत्काल जनपद पंचायतों को भेजें, ताकि उन्हें शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जा सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा प्रभाव
इस नई योजना के लागू होने से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों की अर्थव्यवस्था में सीधा सुधार देखने को मिलेगा। मजदूरों की दैनिक आय बढ़ने से उनकी क्रय शक्ति मजबूत होगी और स्थानीय बाजारों में व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण के 50 हजार से अधिक कार्यों और सूखे हैंडपंपों के रिचार्ज होने से गांवों में गिरते जलस्तर की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा। स्कूलों में शौचालयों के निर्माण से बालिकाओं की शिक्षा में ड्रॉप-आउट दर घटेगी, वहीं मुक्तिधामों के निर्माण से ग्रामीण अधोसंरचना सुदृढ़ होगी। खेती के सीजन में काम बंद रखने के प्रावधान से राज्य के कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मनरेगा के समय 90-10% का अनुपात, अब 60-40 %
मनरेगा के नियमों के तहत ग्रामीणों को दी जाने वाली अकुशल मजदूरी (Unskilled Wage) का 100% खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। सामग्री पर 75:25 का नियम, पक्के निर्माण कार्यों की सामग्री (Material) और प्रशासनिक खर्च में केंद्र 75% और राज्य 25% देता था। औसत अनुपात 90:10% था। जब कुल खर्च को मिलाया जाता था, तो केंद्र सरकार का कुल योगदान लगभग 90% बैठता था और राज्यों को केवल 10% खर्च ही उठाना पड़ता था। छत्तीसगढ़ भी इसी लाभ के अंतर्गत आता था। लेकिन अब 60%-40% प्रतिशत का अनुपात निर्धारित किया गया है। इससे अब छत्तीसगढ़ को करोड़ो रूपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।


