MP-CG News: मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल से जबलपुर होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा तक नए 6-लेन हाई-स्पीड सड़क मार्ग के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इस 15,000 करोड़ रुपये की महा-कॉरिडोर परियोजना के स्वीकृत होने से अब भोपाल और रायपुर के बीच यात्रा का समय घटकर आधा यानी मात्र 6 से 7 घंटे रह जाएगा। मध्य भारत की इस सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों की राजधानियों के बीच कनेक्टिविटी को रफ्तार देना, व्यापारिक माल ढुलाई को सुगम बनाना और पर्यटन को नया आयाम देना है।
परियोजना के तहत भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर-मंडला-चिल्पी घाट से छत्तीसगढ़ सीमा तक 6-लेन हाईवे का कायाकल्प किया जाएगा। इस पूरे कॉरिडोर पर गाड़ियां 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगी। वर्तमान में भोपाल से जबलपुर की 320 किलोमीटर की दूरी तय करने में 6 से 7 घंटे लगते हैं, जो एक्सप्रेसवे बनने के बाद घटकर 255 किलोमीटर और ढाई से तीन घंटे रह जाएगी। वहीं, जबलपुर से रायपुर की दूरी भी 7-8 घंटे से घटकर महज साढ़े तीन से चार घंटे में पूरी होगी। अकेले जबलपुर से छत्तीसगढ़ सीमा वाले हिस्से को अपग्रेड करने पर 2,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
रीजनल हाईवे से एक्सप्रेसवे नेटवर्क बनने का सफर
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच चिल्पी घाट मार्ग लंबे समय से सबसे व्यस्त व्यापारिक और यात्री रूट रहा है। पहाड़ी इलाका और घुमावदार सड़कें होने के कारण यहां अक्सर भारी वाहनों की रफ्तार थम जाती थी और दुर्घटनाओं का जोखिम बना रहता था। बीते कुछ वर्षों में दोनों राज्यों के बीच बढ़ते व्यापारिक दबाव को देखते हुए इस पुराने 2-लेन और 4-लेन मार्ग को 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर में बदलने की मांग उठ रही थी। अब इस प्रोजेक्ट के पास होने से न केवल छत्तीसगढ़ सीमा तक निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा, बल्कि अंतरराज्यीय परिवहन का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा।
मध्यप्रदेश सरकार जबलपुर को बना रही विकास और कनेक्टिविटी का नया केंद्र
— PWD, MP (@pwdminmp) August 10, 2026
✅ मजबूत सड़क अधोसंरचना से जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों को मिलेगी नई रफ्तार@DrMohanYadav51 @CMMadhyaPradesh@MPRakeshSingh @JansamparkMP #LokNirmanSeLokKalyan #JansamparkMP #MadhyaPradesh #Jabalpur pic.twitter.com/C9ig8bPqG4
रोजगार और टाइगर कॉरिडोर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
इस एक्सप्रेसवे के बनने से मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, सागर, दमोह, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, डिंडोरी, मंडला और छत्तीसगढ़ के रायपुर, कवर्धा, बेमेतरा व सिमगा सीधे लाभान्वित होंगे। इसके अतिरिक्त, सरकार द्वारा घोषित 5,500 करोड़ रुपये का टाइगर कॉरिडोर भी इससे जुड़ेगा, जिससे पन्ना, बांधवगढ़ और कान्हा नेशनल पार्क के बीच पर्यटकों की आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी। इस हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से मध्य भारत के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए रायपुर व भोपाल पहुंचना त्वरित हो जाएगा।
साबित होगी मील का पत्थर
यह परियोजना मध्य भारत के ढांचागत विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होते ही धरातल पर निर्माण कार्य तेजी से शुरू होगा। आने वाले समय में जैसे ही इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के टेंडर और शिलान्यास की तारीखें तय होंगी, क्षेत्र के निवासियों और कारोबारियों के लिए यात्रा का नया दौर शुरू हो जाएगा।


