Gariyaband/Nuapara। वन्यजीव तस्करी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम और ओडिशा के खरियार वनमंडल की संयुक्त टीम ने एक जिंदा पेंगोलिन को छुड़ाया है। तस्करों ने इसे छिपाने के लिए सरकारी सिंचाई भवन के स्टार्टर रूम को ही ‘सेफ हाउस’ बना रखा था।

उप संचालक वरुण जैन (उदंती-सीतानदी) और DFO अजीज खान (खरियार) के नेतृत्व में टीम को सूचना मिली थी कि शिकारी जिंदा पेंगोलिन बेचने के लिए ग्राहक ढूंढ रहे हैं।

9 अगस्त से पकड़कर रखा गया था पेंगोलिन को 

टीम ने ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के ग्राम पालमा में दबिश दी। वहां सिंचाई योजना के इनटेक वेल के मोटर पंप स्टार्टर रूम में तलाशी लेने पर जिंदा पेंगोलिन बरामद हुआ। पूछताछ में पता चला कि इसे 9 अगस्त से पकड़कर रखा गया था। बरामदगी के बाद इसे खरियार रोड में पशु चिकित्सक की निगरानी में रखा गया है।

छत्तीसगढ़ तक फैला नेटवर्क, 3 गिरफ्तार

पूछताछ और आरोपियों की निशानदेही के आधार पर संयुक्त टीम ने छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में भी कार्रवाई की। टीम ने पिटापारा निवासी रोशन ठाकुर को उसके घर से गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया। वन विभाग ने मामले में कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोशन ठाकुर (31), निवासी पिटापारा, थाना देवभोग, जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़), बालकृष्णा हाती (30) और सोनू हाती (40), दोनों निवासी ग्राम पालमा, थाना खरियार, जिला नुआपाड़ा (ओडिशा) के रूप में हुई है। तीनों को खरियार न्यायालय में पेश किया गया, जहां न्यायालय के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

ये हैं गिरफ्तार 3 अंतरराज्यीय तस्कर:

1.  रोशन ठाकुर (31) – निवासी पिटापारा, थाना देवभोग, गरियाबंद (छत्तीसगढ़)

2.  बालकृष्णा हाती (30) – निवासी पालमा, थाना खरियार, नुआपाड़ा (ओडिशा)

3.  सोनू हाती (40) – निवासी पालमा, थाना खरियार, नुआपाड़ा (ओडिशा)

मुख्य शिकारी और बिचौलियों की तलाश जारी..

वन विभाग के अनुसार इस मामले में मुख्य शिकारी और कुछ बिचौलियों के अभी फरार होने की जानकारी सामने आई है। उनकी तलाश में टीमों द्वारा लगातार दबिश दी जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि पेंगोलिन को पकड़ने के बाद उसे अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से बेचने की तैयारी की जा रही थी। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

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वन्यजीव कॉरिडोर पर बढ़ाई निगरानी..

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और ओडिशा के सोनाबेड़ा क्षेत्र के बीच का इलाका वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र में अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी रोकने के लिए लगातार संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों राज्यों की टीमों के बीच बेहतर समन्वय से वन्यजीव अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो रही है।

FAQ: दुर्लभ वन्य जीव की तस्करी

सवाल 1. पेंगोलिन कहां से बरामद हुआ?

ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के ग्राम पालमा में सिंचाई योजना के सरकारी भवन के स्टार्टर रूम से जिंदा पेंगोलिन बरामद हुआ, जिसे तस्करों ने सेफ हाउस बना रखा था।

सवाल 2. इस मामले में कौन गिरफ्तार हुए?

3 अंतरराज्यीय तस्कर – गरियाबंद देवभोग के रोशन ठाकुर और ओडिशा पालमा के बालकृष्णा हाती और सोनू हाती को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

सवाल 3. कार्रवाई किसने की?

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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन और खरियार वनमंडल के DFO अजीज खान के नेतृत्व में छत्तीसगढ़-ओडिशा वन विभाग की संयुक्त एंटी पोचिंग टीम ने कार्रवाई की।