Oil Palm Scam Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार पर ऑयल पाम खेती योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और किसानों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है।
“नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल” योजना के तहत घरेलू उत्पादन बढ़ाने के दावों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार का पीपीपी (PPP) आधारित बिजनेस मॉडल केवल कागजों पर ही सीमित है, जबकि धरातल पर किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
रिजेक्टेड पौधों की सप्लाई और गुणवत्ता में भारी खामियां
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख ने आरोप लगाया कि उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर) विभाग दूसरे राज्यों से खारिज (रिजेक्ट) किए गए पौधों के स्टॉक को छत्तीसगढ़ के किसानों को जबरन वितरित कर रहा है। अमानक और गुणवत्ताहीन पौधे देने से किसानों का निवेश और मेहनत दोनों डूबने की कगार पर हैं।
विभाग के आधिकारिक निरीक्षण का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा की सहायक संचालक उद्यानिकी मीना मंडावी ने 29 जुलाई 2026 को पत्र लिखकर 15,222 पौधों की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्ति जताई थी। फील्ड जांच में पाया गया कि:
किसानों को दिए जा रहे पौधे मात्र 1.5 से 2 फीट ऊंचे हैं।
पौधों की उम्र केवल 8 से 10 माह है, जबकि मानक के अनुसार यह 12 से 14 माह होनी चाहिए।
विदेशी वैरायटी होने के बावजूद अनिवार्य PEQ सर्टिफिकेट और प्लांट क्वारंटीन रिलीजिंग लेटर उपलब्ध नहीं कराया गया है।

निजी कंपनियों का खराब ट्रैक रिकॉर्ड और कमीशनखोरी का आरोप
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि योजना के तहत निजी कंपनियों को गुणवत्तापूर्ण पौधे, तकनीकी सहायता, फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट और खरीद की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन पुरानी कंपनियों ‘अम्मा ऑयल पाम’ और ‘3F ऑयल पाम’ का रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है। एक कंपनी ने 13 वर्षों में केवल पौधे बेचे और प्रोसेसिंग यूनिट नहीं लगाई, जबकि दूसरी कंपनी अचानक एग्जिट कर गई जिससे किसानों का भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि दंतेवाड़ा में रिजेक्ट किए गए स्टॉक को अन्य जिलों में खपा दिया गया, वहीं सरगुजा में महीनों से पौधे पहुंचे ही नहीं हैं। सरकार का पूरा ध्यान पारदर्शिता और सतत निगरानी के बजाय केवल कमीशनखोरी पर केंद्रित है।
किसानों के भविष्य पर मंडराया संकट
कांग्रेस के अनुसार ऑयल पाम 25 से 30 साल की दीर्घकालिक फसल है। शुरुआत में ही घटिया और अमानक पौधे लगाने से पौधों की मृत्यु दर (Mortality Rate) बढ़ गई है और आने वाले समय में उपज में भारी गिरावट की आशंका है।
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पूर्व में छत्तीसगढ़ में तरनजीत, जेट्रोफा और सफेद मूसली जैसी योजनाओं का भी यही हश्र हुआ था। अब एक बार फिर मुनाफाखोरी की होड़ में ऑयल पाम के नाम पर प्रदेश के किसानों को बर्बादी की ओर धकेला जा रहा है।
(FAQ)
प्रश्न 1: कांग्रेस ने किस योजना के तहत घोटाले का आरोप लगाया है?
उत्तर: कांग्रेस ने घरेलू पाम तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालित “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल” योजना के तहत छत्तीसगढ़ में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है।
प्रश्न 2: उद्यानिकी विभाग पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए गए हैं?
उत्तर: हॉर्टिकल्चर विभाग पर आरोप है कि वह दूसरे राज्यों के रिजेक्टेड और गुणवत्ताहीन पौधों का स्टॉक छत्तीसगढ़ के किसानों को जबरन बांट रहा है।
प्रश्न 3: दंतेवाड़ा उद्यानिकी विभाग की जांच में पौधों में क्या कमियां पाई गईं?
उत्तर: दंतेवाड़ा में पौधों की ऊंचाई 1.5-2 फीट पाई गई, पत्ती में स्प्लिटिंग नहीं थी, पौधों की उम्र मानक (12-14 माह) से कम (8-10 माह) थी और PEQ सर्टिफिकेट तथा प्लांट क्वारंटीन लेटर भी नहीं था।
प्रश्न 4: ऑयल पाम फसल पर अमानक पौधों का क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: चूंकि ऑयल पाम 25-30 साल की फसल है, इसलिए अमानक पौधों के कारण पौधों की मृत्यु दर बढ़ रही है और भविष्य में फसल उत्पादन घटने का बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।
प्रश्न 5: इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस का क्या रुख है?
उत्तर: कांग्रेस का कहना है कि सरकार किसानों को समृद्ध बनाने के बजाय निजी कंपनियों और अधिकारियों की कमीशनखोरी को बढ़ावा दे रही है, जिससे किसानों का निवेश और मेहनत डूब रही है।


