Election Commission of India
निर्वाचन आयोग ने खर्च का ब्यौरा न देने वाले प्रत्याशियों पर कार्रवाई की

CG Politics: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बनने की उम्मीद रखने वाले नेताओं पर भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। तय सीमा के भीतर अपने चुनावी खर्च का हिसाब न देने के कारण राज्य के 40 नेताओं को आगामी तीन वर्षों के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

हाल ही में आयोग ने चार और प्रत्याशियों पर यह गाज गिराई है, जबकि इससे पहले मार्च तक 36 अभ्यर्थी अयोग्य ठहराए जा चुके थे।

चुनाव खर्च का ब्यौरा न देने में छत्तीसगढ़ देश में चौथे स्थान पर

चुनावी खर्च का ब्यौरा न जमा करने के मामले में छत्तीसगढ़ देशभर में चौथे स्थान पर आ गया है। भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कुल 529 उम्मीदवारों को इस लापरवाही के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, जिनमें से 40 प्रत्याशी अकेले छत्तीसगढ़ से हैं। यह आंकड़ा राज्य में चुनावी नियमों के प्रति अनदेखी की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

See also  CG News : विधानसभा चुनाव के लिए 1200 से अधिक अधिकारियों, प्राध्यापकों, शिक्षकों को दिया गया दंडाधिकारी पावर, देखें जारी राजपत्र

सरायपाली और महासमुंद क्षेत्र के चार और नेता सूची में शामिल

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ताजा आदेश में 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ने वाले चार प्रमुख प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। इनमें सरायपाली क्षेत्र के अजीत डोलचंद चौहान तथा महासमुंद क्षेत्र (क्रमांक 42) से अशोक कश्यप, चंचल वाणी और बृजलाल ठाकुर शामिल हैं। ये सभी प्रत्याशी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना निर्वाचन व्यय लेखा दाखिल करने में पूरी तरह विफल रहे, जिसके चलते आयोग ने इन्हें 3 वर्ष के लिए निरर्हित किया है।

30 दिनों के भीतर व्यय लेखा देना कानूनी रूप से अनिवार्य

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक प्रत्याशी को अपने चुनाव प्रचार और खर्च का पूरा आधिकारिक हिसाब जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा करना होता है। यदि कोई उम्मीदवार समयसीमा के भीतर लेखा दाखिल नहीं करता है या कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो आयोग अधिनियम की धारा 10A के तहत उसे तीन साल के लिए अयोग्य घोषित कर देता है।

See also  दूरदर्शन और आकाशवाणी के इस कदम से तिलमिलाया पाकिस्तान

अयोग्यता का दायरा: लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर असर

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी यह प्रतिबंध आदेश की तिथि से तीन वर्ष के लिए लागू होता है। इस अवधि के दौरान अयोग्य घोषित नेता लोकसभा और विधानसभा का कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकते। हालांकि, यह अयोग्यता राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित स्थानीय निकाय (पंचायत और नगरपालिका) चुनावों पर स्वतः लागू नहीं होती है। आयोग के पास इस अयोग्यता अवधि को कम करने या हटाने का विशेषाधिकार भी सुरक्षित है।

FAQ

प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ के कितने नेताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है?

उत्तर: छत्तीसगढ़ के कुल 40 नेताओं को चुनावी खर्च का हिसाब न देने के कारण तीन साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।

प्रश्न 2: चुनाव लड़ने के बाद खर्च का ब्यौरा कितने दिनों के भीतर देना अनिवार्य है?

उत्तर: नियम के अनुसार चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी के पास व्यय लेखा जमा करना अनिवार्य है।

See also  पुलिस भर्ती का सपना देख रहे युवाओं के लिए खुशखबरी, मुख्यमंत्री ने 22 हजार से ज्यादा पदों पर की भर्ती की घोषणा

प्रश्न 3: निर्वाचन आयोग किस कानून के तहत अयोग्यता की कार्रवाई करता है?

उत्तर: भारत निर्वाचन आयोग लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10A के तहत अयोग्यता की कार्रवाई करता है।

प्रश्न 4: हाल ही में किन चार नेताओं पर अयोग्यता की कार्रवाई की गई है?

उत्तर: हाल ही में सरायपाली के अजीत डोलचंद चौहान और महासमुंद के अशोक कश्यप, चंचल वाणी व बृजलाल ठाकुर को अयोग्य घोषित किया गया है।

प्रश्न 5: क्या यह अयोग्यता स्थानीय निकाय (पंचायत/नगरपालिका) चुनावों पर भी लागू होती है?

उत्तर: नहीं, भारत निर्वाचन आयोग की यह अयोग्यता स्थानीय निकाय (पंचायत और नगरपालिका) चुनावों पर स्वतः प्रभावी नहीं होती है।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
पत्रकारिता जगत में राजनीतिक खबरों से लेकर खेल, धर्म-समाज, पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व, समाज एवं कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल संरक्षण आयोग, महिला आयोग, सहित विविध विभागों की रिपोर्टिंग का अनुभव रहा है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में बदलाव और आम जनता की समस्याओं को सटीक रूप से उजागर करना है।