न्यूयॉर्क। नीदरलैंड ने अपने गोल्ड रिजर्व को लेकर एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है। नीदरलैंड के केंद्रीय बैंक De Nederlandsche Bank (DNB) ने उत्तरी अमेरिका में रखे अपने सोने के एक बड़े हिस्से को लंदन स्थानांतरित किया है।
नीदरलैंड के केंद्रीय बैंक ने करीब 86 मीट्रिक टन सोने की लोकेशन में बदलाव किया गया है। बैंक के मुताबिक, इस फैसले का मकसद किसी संभावित वित्तीय या सिस्टमेटिक संकट के दौरान सोने को ज्यादा तेजी से इस्तेमाल करने योग्य बनाना है।
DNB ने करीब 59 टन सोना न्यूयॉर्क में बेचकर उसके बराबर मात्रा में सोना लंदन में खरीदा। इसके अलावा 27 टन से ज्यादा सोना भौतिक रूप से नीदरलैंड के ज़ीस्ट स्थित कैश सेंटर के जरिए स्थानांतरित किया गया।
अमेरिका से सोना हटाने की क्या है वजह?
DNB के इस कदम को अमेरिका से किसी तत्काल अविश्वास या आर्थिक संकट के संकेत के तौर पर देखना सही नहीं होगा। बैंक ने इस बदलाव को मुख्य रूप से अपने गोल्ड रिजर्व की ट्रेडेबिलिटी और उपलब्धता बढ़ाने की रणनीति के रूप में बताया है।
केंद्रीय बैंकों के लिए सोना सिर्फ एक सुरक्षित संपत्ति नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वित्तीय बाजारों में इस्तेमाल किया जा सकने वाला महत्वपूर्ण रिजर्व भी है। ऐसे में सोने की लोकेशन उसके इस्तेमाल की गति और बाजार तक पहुंच को प्रभावित कर सकती है। DNB चाहता है कि संकट की स्थिति में उसके पास मौजूद सोने को जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपेक्षाकृत तेजी से इस्तेमाल किया जा सके।
लंदन में ही क्यों जमा किया जा रहा है सोना?
लंदन दुनिया के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण गोल्ड ट्रेडिंग सेंटरों में से एक है। यहां बुलियन का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर कारोबार होता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा जाने वाला बुलियन भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार के लिए जरूरी मानकों के अनुरूप होता है।

यही वजह है कि लंदन में रखा सोना जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपेक्षाकृत आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। DNB के मुताबिक, लंदन में गोल्ड रिजर्व रखने से उसकी ट्रेडेबिलिटी और तत्काल उपलब्धता बेहतर होती है।
खासकर किसी बड़े वित्तीय संकट के दौरान यह व्यवस्था केंद्रीय बैंक के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि उस समय बाजार में तेजी से लिक्विडिटी जुटाने की जरूरत पड़ सकती है।
लंदन बना नीदरलैंड के सोने का बड़ा स्टोरेज हब
इस बदलाव के बाद लंदन नीदरलैंड के गोल्ड रिजर्व के लिए सबसे बड़ा स्टोरेज हब बन गया है। इससे DNB की गोल्ड रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है।
अब फोकस सिर्फ सोने को सुरक्षित स्थान पर रखने पर नहीं है, बल्कि उसे ऐसी जगह रखने पर भी है जहां जरूरत पड़ने पर वह जल्दी और आसानी से बाजार में इस्तेमाल किया जा सके।
क्या अमेरिका पर भरोसा कम हुआ?
DNB के इस फैसले को सीधे तौर पर अमेरिका पर भरोसा कम होने के संकेत के रूप में देखना उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने इस बदलाव को अपने गोल्ड रिजर्व को ज्यादा व्यापार योग्य, सुलभ और संकट के समय तुरंत उपलब्ध रखने की रणनीति के तौर पर पेश किया है। लंदन का विशाल गोल्ड ट्रेडिंग नेटवर्क DNB को जरूरत पड़ने पर अपने रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से इस्तेमाल करने का विकल्प देता है।


