Chhattisgarh MP Fund: छत्तीसगढ़ के 11 लोकसभा क्षेत्रों में सांसद निधि से तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 2,284 विकास कार्य मंजूर किए गए। इनमें से अब तक 895 परियोजनाएं ही पूरी हो पाई हैं, जबकि 1,389 काम अभी लंबित हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 61 प्रतिशत स्वीकृत परियोजनाएं अभी पूरी होने का इंतजार कर रही हैं।
सांसद निधि के तहत लोकसभा सांसदों को हर साल 5 करोड़ रुपये उपलब्ध होते हैं। ऐसे में स्वीकृत परियोजनाओं के साथ उनके क्रियान्वयन और समय पर पूरा होने की स्थिति भी अहम हो जाती है।
हर सांसद को सालाना 5 करोड़ की सांसद निधि
लोकसभा सांसदों को अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए हर साल 5 करोड़ रुपये की सांसद निधि उपलब्ध होती है। यह राशि दो किस्तों में जारी की जाती है। सांसद अपने लोकसभा क्षेत्र की जरूरत और प्राथमिकताओं के आधार पर अलग-अलग विकास कार्यों को मंजूरी देते हैं। नियमों के मुताबिक पहली किस्त की निर्धारित राशि खर्च होने के बाद अगली किस्त जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
कमलेश जांगड़े के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम पूरे
उपलब्ध आंकड़ों में कमलेश जांगड़े के क्षेत्र में 344 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 254 काम पूरे हो चुके हैं। स्वीकृत और पूर्ण कार्यों के अनुपात के लिहाज से यह आंकड़ा कई अन्य लोकसभा क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है। ज्योत्सना चरणदास महंत के क्षेत्र में 310 कार्य स्वीकृत हुए हैं। इनमें 136 पूरे हो चुके हैं। वहीं, चिंतामणि महाराज के क्षेत्र में 330 स्वीकृत कार्यों में से 70 पूरे हुए हैं।
बृजमोहन अग्रवाल और विजय बघेल के क्षेत्र में कितने काम?
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के क्षेत्र में 164 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 38 काम पूरे हुए हैं। दुर्ग सांसद विजय बघेल के क्षेत्र में 218 कार्य मंजूर किए गए। इनमें 70 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं, लेकिन पूर्ण हो चुके कार्यों की संख्या अभी स्वीकृत परियोजनाओं से काफी कम है।
भोजराज नाग के क्षेत्र में सबसे कम काम स्वीकृत
कांकेर सांसद भोजराज नाग के क्षेत्र में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 87 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। यह 11 सांसदों में सबसे कम है। इनमें से 29 काम पूरे हो चुके हैं। उपलब्ध खर्च संबंधी आंकड़ों में भी भोजराज नाग के क्षेत्र में सांसद निधि के उपयोग की स्थिति कई अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम दिखाई देती है। हालांकि, खर्च के प्रतिशत की सटीक तुलना के लिए विभागीय मूल रिकॉर्ड से आंकड़ों का मिलान जरूरी है।
बस्तर और रायपुर में पूर्णता दर कम
उपलब्ध जानकारी के अनुसार बस्तर लोकसभा क्षेत्र में करीब 18.4 प्रतिशत स्वीकृत कार्य पूरे हुए हैं। रायपुर में यह आंकड़ा करीब 23.2 प्रतिशत बताया गया है। वहीं, सरगुजा के आंकड़ों में 212 प्रतिशत पूर्णता दर दर्ज है। यह आंकड़ा उपलब्ध स्वीकृत और पूर्ण कार्यों के संदर्भ में संभव नहीं है। इसलिए इसे डेटा या टाइपिंग त्रुटि मानने से पहले आधिकारिक स्रोत से पुष्टि जरूरी है।
1,389 परियोजनाएं अभी लंबित
तीन वित्तीय वर्षों की उपलब्ध जानकारी में 2,284 विकास कार्य स्वीकृत किए गए। इनमें से 895 पूरे हुए हैं और 1,389 अभी अधूरे हैं। किसी परियोजना को मंजूरी मिलना विकास प्रक्रिया का पहला चरण है। इसके बाद प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर, निर्माण एजेंसी, जमीन और स्थानीय स्तर की दूसरी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। यही वजह है कि स्वीकृत और पूर्ण परियोजनाओं की संख्या में अंतर हो सकता है। बता दें कि सांसद निधि का उद्देश्य लोकसभा क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विकास कार्य कराना है। ऐसे में बड़ी संख्या में स्वीकृत परियोजनाओं का लंबित रहना उनके क्रियान्वयन और निगरानी की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है। अब अहम सवाल यह है कि लंबित 1,389 परियोजनाएं कब तक पूरी होती हैं और सांसद निधि से मंजूर कार्यों की निगरानी को लेकर प्रशासन किस तरह आगे बढ़ता है।


