रायपुर। बैलाडिला की जिस डिपाजिट खदान नंबर 13 को लेकर आदिवासियों और तमाम दूसरे लोगों की नौ-तेरह गुजर रही है। उसे अडाणी को भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव परिणामों से मात्र 5 दिन पहले दिया।

इसका खुलासा प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। यहां ये भी ध्यान रहे कि प्रदेश में उस वक्त आचार संहिता प्रभावी थी। अब कांगे्रस आदिवासियों के कोप का शिकार नहीं होना चाहती।

ऐसे में उसने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी। तो वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री ने दूरंदेशी दिखाई और मामले का खुलासा करके अपना कॉलर साफ कर लिया। ये पूरा सौदा आदर्श आचार संहिता के दौरान हुआ था, यही कारण था कि सीएम बघेल ने फाइल देखकर कार्रवाई की बात कही है।

तो उन्होंने ये भी कहा कि पिछली सरकार के निर्णयों की समीक्षा की जरूरत है। सीएम ने भी इस सौदे पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इस मामले में लोगों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बात का कांग्रेस पार्टी ने भी समर्थन किया।

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कांग्रेस ने जनता के सामने रखा अपना पक्ष:

इस खुलासे के माध्यम से कांग्रेस ने आदिवासियों के सामने परोक्ष रूप से अपना पक्ष रख दिया। जो जानकार हैं उनकी सम­ा में आ गया कि ये सारा कारनामा पिछली सरकार का है न कि कांग्रेस का। ऐसा करके कांग्रेस ने अपने सिर पर आई बॉल को भाजपा की ओर उछाल दिया।

कब क्या हुआ कांग्रेस के मुताबिक:

कांग्रेस ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि टेन्डर डाक्यूमेंट एनसीएल की बोर्ड की मीटिंग में 28.07.2018 को एप्रुव किया गया। लेटर आफ इंटेट एलओआई 20.09.2018 को जारी किया गया और 6.12.2018 को हैदराबाद में एनसीएल सीएमडी, एनएमडीडी के चेयरमैन द्वारा अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

जब कि इस दौरान प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू थी। तो वहीं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने 17 दिसंबर 2018 को शपथग्रहण किया है। इसका लब्बोलुआब ये कि कांग्रेस ने इसे नहीं किया। ये सब भाजपा सरकार का किया धरा है।

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क्यों पड़ी इसकी जरूरत:

ऐसा करके कांग्रेस एक बार फिर से आदिवासियों का विश्वास जीतने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा इनके मन में भाजपा के प्रति नफरत भी पनपेगी। बस्तर को छत्तीसगढ़ की सत्ता का प्रवेश द्वार कहा जाता है।

ऐसे में कांग्रेस की पूरी कोशिश होगी कि वो ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहेगी कि जिससे उसकी साख बस्तर में खराब हो। कुल मिलाकर ये आदिवासियों के गुस्से को कम करने की एक कवायद भर है।

तो वहीं इस आंदोलन में अपनी सहभागिता जताने की भी कोशिश है। इससे एक बात तो साफ है कि दिल्ली गए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संभवत: इस मामले पर भी पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष से कुछ विचार-विमर्श कर सकते हैं। लोगों को यही उम्मीद भी लगी है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस मामले को संज्ञान में लेकर प्रभावी कार्रवाई जरूर करेंगे।

भाजपा विधानसभा में मचाएगी हंगामा:

इसका रिएक् शन ये होगा कि जुलाई के दूसरे हफ्ते में विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इसमें भाजपा सदन की कार्रवाई में बाधा खड़ी करेगी। इसमें अडाणी की खदान, नेता प्रतिपक्ष पर महिला की ओर से लगाए गए आरोप। तमाम दूसरे मुद्दे भाजपा जरूर उठाएगी और इन्हीं सवालों पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश करेगी।

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