टीआरपी डेस्क। कोरोना वायरस महामारी के कारण लम्बे समय से बंद स्कूल क्रमबद्ध तरीके से 15 अक्टूबर से दोबारा खुलने जा रहे हैं। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि स्वास्थ्य, साफ-सफाई, सुरक्षा और सोशल डिस्टेंसिंग के मानक का पालन करते हुए  पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए अपनी खुद की एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करें।  

लिखित अनुमति के बाद ही स्कूल जा सकेंगे

दिशा-निर्देशों के अनुसार छात्र अभिभावकों की लिखित अनुमति के बाद ही स्कूल जा सकेंगे। उपस्थिति के नियमों में लचीलापन रहेगा। छात्र स्कूल जाने के स्थान पर ऑनलाइन क्लासेज का भी चयन कर सकेंगे। मंत्रालय ने छात्रों के मूल्यांकन के लिए कागज-कलम से होने वाले टेस्ट के स्थान पर सिखाने वाली प्रक्रिया को अपनाने की बात कही है। स्कूल खुलने के दो से तीन सप्ताह तक कोई मूल्यांकन नहीं होगा। ऑनलाइन लर्निंग को प्रोत्साहन दिया जाएगा। 

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अभिभावकों की लिखित सहमति होगी जरूरी

बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के प्रसार पर रोक लगाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से देशभर के स्कूल-कॉलेज पिछले छह महीने से बंद पड़े हैं। बीती एक अक्तूबर को देश ने अनलॉक के पांचवे चरण में प्रवेश किया, जिसके तहत सरकार लॉकडाउन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों में राहत दे रही है। इसी के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों में स्कूलों को भी 15 अक्तूबर से खोलने का आदेश दिया गया है।

फैसला अभिभावक ही करेंगे कि छात्र स्कूल जाएगा या नहीं

स्कूलों के दोबारा खुलने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि स्कूल जाने के लिए छात्रों को अभिभावकों की लिखित सहमति लेनी होगी। इस बात का फैसला अभिभावक ही करेंगे कि छात्र स्कूल जाएगा या नहीं। अगर स्कूल पहुंचने पर छात्र के पास अभिभावक का अनुमति पत्र नहीं है तो उसे प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वहीं, ऑनलाइन एजुकेशन भी जारी रहेगी और इसे और कारगर बनाने के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

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अभिभावकों और संस्थानों से बात कर खोल सकते हैं स्कूल

अनलॉक के पांचवें चरण के लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए गृह मंत्रालय ने कहा था कि राज्यों की सरकारें अपने यहां कोरोना वायरस महामारी की स्थिति को देखते हुए 15 अक्तूबर के बाद से स्कूल-कॉलेज खोलने का फैसला कर सकेंगे। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि मंत्रालय ने राज्यों को छूट दी है कि वे अपनी परिस्थितियों को देखते हुए अभिभावकों और संस्थानों से बात कर स्कूल खोल सकते हैं।

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