Paddy Crop Insurance Claim: छत्तीसगढ़ में अर्नब चक्रवात के कारण हुई बेमौसम बारिश और बदलते मौसम से धान की फसल को नुकसान होने पर किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कराया है, वे नियमानुसार नुकसान की सूचना देकर मुआवजे के लिए दावा कर सकते हैं। इसके लिए समय पर सूचना देना और जरूरी दस्तावेज तैयार रखना बेहद जरूरी है।
बता दे कि छत्तीसगढ़ में अब तक महज 10 फ़ीसदी धान की कटाई ही पूरी हो सकी है। हार्वेस्टर और मजदूरों से चल रहा कटाई मिजाई का काम बारिश के चलते पूरी तरह ठप हो गया है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की बालियां भीग गई हैं। खलिहानों में रखी उपज में नमी के कारण फफूंद और अंकुरण का जोखिम बढ़ गया है। ऐसे में अगर आपने फसल बीमा कराया है तो आपको थोड़ी राहत मिल सकती है। तो चलिए जानते है कि फसल बीमा क्लेम करने के लिए किसानों को क्या करना होगा?
नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर दें
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नियमों के अनुसार, स्थानीय आपदा या कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी फसल को नुकसान होने पर किसान को घटना के 72 घंटे के भीतर सूचना देनी चाहिए। इसके लिए किसान बीमा कंपनी, संबंधित बैंक, कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारी या टोल फ्री नंबर 14447 पर संपर्क कर सकते हैं।
इन तरीकों से दर्ज कराएं शिकायत
किसान फसल बीमा योजना के आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in पर जाकर भी नुकसान की सूचना दे सकते हैं। इसके अलावा क्रॉप इंश्योरेंस मोबाइल एप, बैंक शाखा, कृषि विभाग के कार्यालय या बीमा कंपनी के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत करते समय अपना बीमा विवरण और प्रभावित खेत की जानकारी जरूर दें।
ये दस्तावेज और जानकारी रखें तैयार
फसल नुकसान का दावा करने के लिए किसानों को आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण, जमीन से जुड़े दस्तावेज, फसल बीमा पॉलिसी या आवेदन की जानकारी और बोई गई फसल का विवरण तैयार रखना चाहिए। प्रभावित खेत की तस्वीरें, सर्वे नंबर और नुकसान वाले रकबे की जानकारी भी सुरक्षित रखें। शिकायत दर्ज कराने के बाद उसकी रसीद या शिकायत नंबर जरूर लें।
खेत में खड़ी फसल और कटाई के बाद नुकसान के नियम अलग
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खड़ी फसल के नुकसान का आकलन अधिसूचित क्षेत्र के आधार पर किया जाता है। वहीं, कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी फसल को कुछ निर्धारित प्राकृतिक आपदाओं और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान पर अधिकतम 14 दिनों तक बीमा सुरक्षा मिल सकती है। इसके लिए फसल का खेत में कटाई के बाद फैली हुई या छोटी गठरी के रूप में होना जरूरी है।
धान की फसल के मामले में यह बात जरूर जानें
धान पानी वाली फसल होने के कारण बीमा के नियमों में इसकी स्थिति अलग हो सकती है। धान में केवल खेत में पानी भर जाने को स्थानीय आपदा के तहत नुकसान नहीं माना जाता। खड़ी फसल के नुकसान का दावा अधिसूचित क्षेत्र और फसल उपज के आकलन के आधार पर तय होता है। इसलिए किसान अपने जिले, फसल और बीमा पॉलिसी पर लागू नियमों की जानकारी कृषि विभाग या बीमा कंपनी से जरूर लें।
शिकायत के बाद क्या होगा?
शिकायत मिलने के बाद बीमा कंपनी और संबंधित सरकारी अधिकारी नुकसान का सत्यापन कर सकते हैं। स्थानीय नुकसान के मामलों में खेत का निरीक्षण और जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसके बाद योजना के नियमों और पात्रता के आधार पर मुआवजे का निर्धारण होता है। केवल शिकायत दर्ज कराने से मुआवजा मिलना तय नहीं होता।



